Newzfatafatlogo

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का बढ़ता संकट: एक्यूआई 400 के पार

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर गंभीर हो गया है, जहां एक्यूआई 400 के पार जा चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति लोगों की सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है। जानें कि कैसे प्रदूषण फेफड़ों, दिल और मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है और इससे बचने के उपाय क्या हैं।
 | 

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की गंभीर स्थिति

नई दिल्ली। दिवाली से पहले ही दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण के प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। बढ़ते प्रदूषण का स्तर लोगों की सेहत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हवा में मौजूद जहरीले धुएं, धूल और सूक्ष्म प्रदूषण कण फेफड़ों, दिल और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकते हैं।


बुधवार को दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया। कई स्थानों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 350 से 400 के बीच दर्ज किया गया, जिसे गंभीर और खतरनाक माना जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, सुबह आठ बजे दिल्ली का एक्यूआई 377, नोएडा में 314, ग्रेटर नोएडा में 266, गाजियाबाद में 236 और गुरुग्राम में 324 दर्ज किया गया। दिल्ली के द्वारका-मुंडका और जहांगीरपुरी जैसे क्षेत्रों में एक्यूआई 450 के करीब पहुंच गया है। नोएडा सेक्टर 62 में 426 एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया है।


एक्यूआई 400 से ऊपर होना कितना खतरनाक है?

दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है। मंगलवार को अधिकांश क्षेत्रों में एक्यूआई 400 के पार रहा, और बुधवार को भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। एक्यूआई पैमाने पर 401-500 के बीच के स्तर को गंभीर माना जाता है। यह हवा में मौजूद प्रदूषक स्वस्थ व्यक्तियों को भी प्रभावित कर सकते हैं। पहले से अस्थमा, सांस की बीमारी, दिल की समस्या और फेफड़ों की समस्याओं से ग्रस्त लोगों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। ऐसे प्रदूषण के संपर्क में आने से खांसी, गले में खराश, आंखों में जलन, सांस फूलना और सीने में भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।


ब्लैक कार्बन से होने वाली समस्याएं

ब्लैक कार्बन, जिसे आमतौर पर कालिख कहा जाता है, डीजल वाहनों के धुएं, कोयला, लकड़ी या अन्य जैविक ईंधनों के जलने से उत्पन्न होता है। पराली जलाने से इसके खतरे में वृद्धि होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, ब्लैक कार्बन पीएम2.5 कणों का हिस्सा है, जो इतने छोटे होते हैं कि ये फेफड़ों में पहुंच सकते हैं।


ब्लैक कार्बन के कण बहुत सूक्ष्म होते हैं। प्रदूषित हवा में सांस लेने से ये कण फेफड़ों में पहुंच सकते हैं। लगातार संपर्क में रहने से शरीर में सूजन और सांस से संबंधित समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। अस्थमा के मरीजों में ये सांस लेने में कठिनाई और अस्थमा अटैक को बढ़ा सकते हैं। ब्लैक कार्बन के संपर्क से हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ता है।


प्रदूषण से बचने के उपाय

दिल्ली-एनसीआर में एक्यूआई 400 के पार जा चुका है, और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में स्थिति और भी बिगड़ सकती है। ऐसे में सभी को बचाव के उपाय अपनाने चाहिए।

सुबह और शाम के समय बाहर वॉक या दौड़ने से बचें। खुले में व्यायाम करने के बजाय घर के अंदर हल्की एक्सरसाइज करें। बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला मास्क पहनें। घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें। यदि बाहर प्रदूषण का स्तर अधिक हो, तो अतिरिक्त सावधानी बरतें। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा या दिल के मरीजों को विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द या लगातार खांसी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।