दिल्ली की अदालत ने यासीन मलिक और अन्य पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय किए
दिल्ली की विशेष अदालत का निर्णय
नई दिल्ली: दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने यासीन मलिक सहित सात अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि मामले में उपलब्ध सामग्री आरोपियों के खिलाफ मजबूत संदेह उत्पन्न करती है।
मामले का विवरण
यह मामला आतंकवाद और अलगाववादी गतिविधियों के लिए विदेशों से भेजी गई धनराशि से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में पैसे के लेन-देन और उनके उपयोग की जांच कर रहा है।
कोर्ट का निर्णय
अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों पर विचार करते हुए आरोप तय करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से आरोपियों के खिलाफ ऐसा मजबूत संदेह बनता है, जिसके आधार पर PMLA के तहत आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। हालांकि, आरोप तय होना दोष साबित होना नहीं है। मामले में आरोपियों के खिलाफ आगे अदालत में सुनवाई होगी और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
ED का दावा
प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि आरोपियों को लगभग ₹8.94 करोड़ की धनराशि पहुंचाई गई। एजेंसी के अनुसार, यह पैसा पाकिस्तान और अन्य आतंकवादी संगठनों से हवाला और अन्य माध्यमों के जरिए भारत लाया गया था।
आरोपियों की सूची
यासीन मलिक के अलावा इस मामले में कुल सात आरोपी हैं, जिनमें जहूर अहमद शाह वटाली, अब्दुल राशिद शेख, शबीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, मसरत आलम भट और ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन आरोपियों के बीच धन के लेन-देन और उसे विभिन्न माध्यमों से पहुंचाने की गतिविधियां हुईं।
जांच की शुरुआत
प्रवर्तन निदेशालय ने 14 जून 2017 को इस मामले में शिकायत दर्ज की थी, जिसके बाद जांच में सामने आए वित्तीय लेन-देन और मनी ट्रेल के आधार पर कार्रवाई की गई। अब अदालत के ताजा आदेश के बाद आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
आगे की प्रक्रिया
कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत लगाए गए आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया के दौरान विस्तृत सुनवाई होगी। इस मामले में अदालत का अंतिम फैसला आने तक आरोपों को केवल आरोप के तौर पर ही देखा जाएगा।
