दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने के बाद की स्थिति: छात्रों की सुरक्षा पर सवाल
सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना
लगभग दो महीने पहले, 6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला इमारत ढह गई थी, जिसमें सात लोगों की जान चली गई, जिनमें से पांच छात्र थे। इस घटना के बाद, दिल्ली नगर निगम और अन्य सरकारी विभागों की काफी आलोचना हुई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने तब घोषणा की थी कि अवैध इमारतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके तुरंत बाद, MCD ने कई इमारतों को नोटिस जारी किया और कुछ को सील भी कर दिया। लेकिन अब, दो महीने बाद भी सत्य निकेतन में पहले की तरह पीजी चल रहे हैं और कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
छात्रों की चिंताएं
सत्य निकेतन और आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों का कहना है कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता है, लेकिन वे मजबूर हैं। कई छात्रों ने बताया कि इमारतों में सीलन की समस्या है, लेकिन पीजी मालिकों ने कोई कार्रवाई नहीं की। सत्य निकेतन के बाद दो और हादसों में सात लोग मारे गए हैं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। इस पर सवाल उठता है कि क्या MCD और दिल्ली सरकार को एक और बड़े हादसे का इंतजार है?
सरकार की कार्रवाई की घोषणाएं
7 सितंबर को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा था कि खतरनाक इमारतों को नहीं छोड़ा जाएगा और सभी का स्ट्रक्चरल ऑडिट किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पुरानी इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उसी दिन मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी कहा कि विधायकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अवैध इमारतें न बनें।
छात्रों की स्थिति
दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों के छात्र सत्य निकेतन और मोची गांव में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। छात्रों ने बताया कि हादसे के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। एक छात्र ने कहा कि पीजी में रहने पर डर लगता है और सुरक्षा के कोई नियम नहीं हैं।
सत्य निकेतन में बदलाव
6 सितंबर की घटना के बाद, यह कहा गया था कि सत्य निकेतन खाली हो जाएगा, लेकिन 50 दिन बाद भी सब कुछ सामान्य है। छात्र अपनी कक्षाओं के बाद डर के साए में अपने पीजी लौटते हैं।
मोती गांव की स्थिति
मोती गांव में स्थिति और भी खराब है। यहां मकानों के बीच की दूरी एक फीट से भी कम है और गलियां इतनी तंग हैं कि दो लोग एक साथ नहीं चल सकते। इसके बावजूद, मकान मालिक छात्रों से अधिक किराया वसूलते हैं।
MCD की कार्रवाई
दिल्ली नगर निगम ने चार मंजिला से अधिक अवैध निर्माणों को सील करने का आदेश दिया था, लेकिन सत्य निकेतन में सैकड़ों चार मंजिला इमारतें अभी भी खड़ी हैं। MCD ने अवैध निर्माण की अनुमति देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
