दिल्ली के सत्यनिकेतन में पीजी इमारत ढहने से 7 की मौत, रेंट एग्रीमेंट पर उठे सवाल
दिल्ली में पीजी इमारत का दर्दनाक हादसा
नई दिल्ली। अक्सर लोग बिना पढ़े रेंट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर देते हैं। बीते रविवार को दिल्ली के सत्यनिकेतन में हुए पीजी हादसे के बाद एक एग्रीमेंट ने इस लापरवाही का गंभीर परिणाम दिखाया है।
पीजी के मालिक ने किरायेदारों से यह लिखवाया था कि यदि भवन में कोई दुर्घटना होती है और इससे मौत भी हो जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी पीजी अधिकारियों की नहीं होगी। यह शर्त न केवल कानूनी दृष्टि से विवादास्पद है, बल्कि यह भी सवाल उठाती है कि क्या ऐसे 'छूट पत्र' वास्तव में मालिक को सुरक्षा की जिम्मेदारी से मुक्त कर सकते हैं, या ये केवल कागजी ढाल हैं जो पीड़ित परिवारों को न्याय से वंचित कर देती हैं।
दक्षिण दिल्ली के सत्या निकेतन में रविवार को एक पांच मंजिला पीजी इमारत के ढहने से 7 लोगों की मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद अब किरायेदारों के साथ किए गए रेंट एग्रीमेंट की कॉपी सामने आई है, जिसने बिल्डिंग मालिकों की मनमानी और छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से लिखा था कि पीजी अधिकारी/मकान मालिक किसी भी अनहोनी, दुर्घटना या जानमाल के नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। अब जब यह इमारत ढह गई है, तो इस शर्त का महत्व और बढ़ गया है।
पीजी के रेंट एग्रीमेंट की शर्तें
जानें PG के रेंट एग्रीमेंट में क्या-क्या लिखा?
मेरे द्वारा हॉस्टल में रिजर्व की गई सीट दिनांक ______ से ______ तक की पूरी अवधि के लिए होगी। मैं इसके लिए अपनी सहमति प्रदान करता/करती हूं।
किरायेदार को रुपये______/- (2 महीने की सिक्योरिटी राशि) और एक महीने का अग्रिम किराया रुपये______/- जमा करना होगा। समझौते की अवधि पूरी होने से पहले, यानी लॉक-इन अवधि ______ तक, किसी भी स्थिति में सिक्योरिटी राशि वापस नहीं की जाएगी।
कमरे में उपलब्ध फर्नीचर, सामान या अन्य सुविधाओं को किसी भी प्रकार का नुकसान होने पर उसकी राशि सिक्योरिटी डिपॉजिट से काट ली जाएगी।
निर्धारित शुल्क प्रत्येक महीने की तारीख ______ तक जमा करना अनिवार्य होगा। समय पर भुगतान नहीं करने पर अतिरिक्त शुल्क/लेट फीस लागू होगी।
पीजी की दीवारों पर पोस्टर, स्टिकर चिपकाना, पेंट करना या किसी भी प्रकार से लिखना प्रतिबंधित है।
अगर मैं तय समय पूरा होने से पहले किसी भी कारण से पीजी छोड़ता/छोड़ती हूं, तो मैं पहले से जमा किए गए हॉस्टल/पीजी शुल्क और सिक्योरिटी राशि की वापसी का दावा नहीं करूंगा/करूंगी।
पीजी अधिकारी मेरी किसी भी प्रकार की जानमाल की हानि या जोखिम के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।
मैं सहमत हूं कि आवास, अनुशासन और आचरण से जुड़े सभी मामलों में पीजी प्रबंधन का निर्णय अंतिम और मेरे लिए बाध्यकारी होगा।
मैं स्वीकार करता/करती हूं कि यदि मैं पीजी के निर्धारित नियमों का पालन नहीं करता/करती हूं, तो पीजी प्रबंधन को मुझे बिना किसी कारण बताए कमरा खाली करने के लिए कहने का अधिकार होगा।
हॉस्टल/पीजी छोड़ने से पहले मैं अपने सभी बकाया भुगतान पूरी तरह से चुका दूंगा/दूंगी और कमरे में उपलब्ध सभी फर्नीचर और अन्य सामान, जैसे आईना, फर्नीचर, चाबी और अन्य वस्तुएं, पीजी प्रबंधन को सही स्थिति में वापस सौंप दूंगा/दूंगी।
हादसे के बाद की स्थिति
हादसे के बाद मकान मालिक फरार
दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इमारत का मालिक हरिराम हादसे के बाद से फरार है। पुलिस ने उसके खिलाफ 'लुक आउट सर्कुलर' जारी किया है और कई ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
रविवार दोपहर करीब 1:15 से 1:30 बजे के बीच हुए इस हादसे के बाद NDRF और दिल्ली पुलिस की टीमों ने मलबे से 11 छात्रों को सुरक्षित निकाला, जबकि 7 छात्रों की अस्पताल में मौत हो गई। स्थानीय विधायक अनिल शर्मा ने बताया कि इमारत लगभग 40 साल पुरानी थी और उसमें 13 छात्र और 3-4 मजदूर मौजूद थे।
कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा?
हादसे के कारणों की प्रारंभिक जांच में मरम्मत कार्य और जलभराव को मुख्य वजह माना जा रहा है। विधायक अनिल शर्मा ने आरोप लगाया कि पुरानी इमारत के बेसमेंट या ग्राउंड फ्लोर पर बिना अनुमति के तोड़फोड़ और मरम्मत का काम चल रहा था, जिसमें मकान मालिक ने भार उठाने वाली मेन दीवार को कमजोर बना दिया था।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा कर बताया कि बेसमेंट में पानी भरा हुआ था। सीलन और पुराने ढांचे में बेसमेंट के छेड़छाड़ के कारण पूरी इमारत ढह गई। MCD ने पास की संपत्ति संख्या 13 को भी खतरनाक घोषित कर 3 दिनों में गिराने का आदेश दिया है।
