दिल्ली पुलिस ने CJP प्रोटेस्ट से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट में नई मांग रखी
दिल्ली पुलिस की नई याचिका
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने CJP प्रोटेस्ट से संबंधित मामलों में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक नई याचिका प्रस्तुत की है। पुलिस ने 21 से 26 जुलाई 2026 के बीच दर्ज 13 FIR को अनुच्छेद 142 के तहत रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही, NCRB के रिकॉर्ड के आधार पर प्रदर्शन स्थल पर उपस्थित 2873 व्यक्तियों की भूमिका की जांच के लिए अलग FIR दर्ज करने की अनुमति भी मांगी गई है। इस मामले की सुनवाई मंगलवार, 1 सितंबर को होगी।
FIR की सूची और पुलिस का तर्क
दिल्ली पुलिस ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार के 25 जुलाई 2026 के निर्णय के बाद, वह 20 से 25 जुलाई के बीच CJP प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। याचिका में 13 FIR की पूरी सूची शामिल है, जिसमें बाराखंभा रोड, कर्तव्य पथ, पार्लियामेंट स्ट्रीट, मंदिर मार्ग, कनॉट प्लेस और पटेल स्ट्रीट जैसे स्थानों के थाने शामिल हैं।
गंभीर धाराओं के तहत दर्ज FIR
इन FIR में दंगा, हत्या के प्रयास और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। कुछ मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के साथ सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई थीं। अब पुलिस ने इन सभी 13 मामलों को अनुच्छेद 142 के तहत समाप्त करने की मांग की है।
2873 व्यक्तियों पर अलग FIR की आवश्यकता
दिल्ली पुलिस ने NCRB के डेटाबेस के आधार पर 2873 व्यक्तियों की पहचान की है, जिनका आपराधिक इतिहास गंभीर है और जो प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे। पुलिस का कहना है कि इनकी भूमिका की अलग से जांच आवश्यक है। यह जांच यह निर्धारित करेगी कि इनमें से कोई व्यक्ति प्रदर्शन के दौरान शारीरिक नुकसान या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल था या नहीं।
विशेष अनुमति की मांग
पुलिस ने इन 2873 व्यक्तियों के खिलाफ एक नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है। याचिका के अनुसार, इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट के 3 अगस्त 2026 के आदेश के अनुसार की जाएगी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवेदन में शामिल घटनाओं के संबंध में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी, जिससे जांच का दायरा इसी प्रस्तावित FIR तक सीमित रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तारीख
दिल्ली पुलिस ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि इस मामले में दिया जाने वाला आदेश विशेष परिस्थितियों तक सीमित रहे और भविष्य में इसे मिसाल के रूप में न लिया जाए। यह आवेदन 31 अगस्त 2026 को दाखिल किया गया था। इससे पहले, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस सूर्य कांत के समक्ष मामले का उल्लेख कर जल्द सुनवाई का आग्रह किया था। अब 1 सितंबर को अदालत का निर्णय सामने आएगा।
