दिल्ली पुलिस में विवाद: ACP मनस्वी वशिष्ठ का निलंबन और पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन
दिल्ली पुलिस विवाद का नया मोड़
दिल्ली पुलिस में विवाद: दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच शाहदरा थाने में उत्पन्न विवाद अब और बढ़ गया है। पुलिस मुख्यालय के बाहर सोमवार को ACP मनस्वी वशिष्ठ ने अपने तबादले के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप गृह मंत्रालय ने उन्हें निलंबित कर दिया। गृह मंत्रालय ने उनके प्रदर्शन में भाग लेने और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का उल्लंघन करने को अनुशासनहीनता माना है। इस निलंबन के साथ ही दिल्ली पुलिस के भीतर चल रहा विवाद एक नए चरण में प्रवेश कर गया है.
गृह मंत्रालय की कार्रवाई
रिपोर्टों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने सोमवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन को गंभीरता से लिया। ACP मनस्वी वशिष्ठ पर आरोप है कि उन्होंने अपने तबादले के विरोध में पुलिसकर्मियों को एकजुट किया और प्रदर्शन के दौरान भाषण दिया। गृह मंत्रालय ने इसे पुलिस बल के अनुशासन और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों के उल्लंघन के रूप में देखा। इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब दिल्ली पुलिस पहले से ही वकीलों के साथ विवाद और उसके बाद हुए पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन को लेकर चर्चा में है।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन
2 नवंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 के बाहर लगभग 80 से 100 पुलिसकर्मी, जिनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं, एकत्र हुए। प्रदर्शनकारी ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले का विरोध कर रहे थे। पुलिसकर्मियों की मांग थी कि दोनों अधिकारियों को उनके पुराने पदों पर बहाल किया जाए। वे पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से सीधे मुलाकात कर अपनी शिकायतें और पक्ष रखना चाहते थे। इस दौरान ACP मनस्वी वशिष्ठ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पुलिसकर्मियों की मांगें स्पष्ट हैं और उन्होंने पुलिस थानों में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट SOP बनाने की आवश्यकता बताई।
ACP मनस्वी वशिष्ठ का तबादला क्यों हुआ?
इस विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा थाने में हुई थी। अधिवक्ता ललित बंसल के साथ मारपीट की घटना में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। इस मामले में अधिवक्ता अमूल्य रतन की शिकायत पर FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद कई वकील आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंचे थे। वकीलों ने आरोप लगाया कि ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार ने आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। वकीलों का यह भी आरोप था कि जब उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए तो ACP मनस्वी वशिष्ठ ने उन्हें धमकाया। विवाद बढ़ने के बाद दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने अनिश्चितकालीन न्यायिक कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया था।
28 अक्टूबर को ACP और SHO का तबादला
वकीलों के विरोध और बढ़ते विवाद के बीच, दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने 28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ का तबादला गांधी नगर सब-डिवीजन से स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वूमेन एंड चिल्ड्रन (SPUWAC) में कर दिया। वहीं, शाहदरा थाने के तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सिक्योरिटी यूनिट में भेज दिया गया। इन दोनों अधिकारियों के तबादले के बाद दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त कर दी थी। लेकिन इस फैसले से पुलिस विभाग के एक वर्ग में नाराजगी पैदा हो गई और पुलिसकर्मियों ने दोनों अधिकारियों के समर्थन में आवाज उठानी शुरू कर दी।
