दिल्ली मास्टर प्लान 2047: 70 गांवों और यमुना बाढ़ क्षेत्र में बड़े बदलाव
दिल्ली 2047 मास्टर प्लान की जानकारी
दिल्ली 2047 मास्टर प्लान समाचार: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने राजधानी के विकास के लिए मास्टर प्लान 2047 को मंजूरी दे दी है। यह योजना दिल्ली में आवास, सड़क, परिवहन, पर्यावरण, व्यापार और शहरी विकास के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करेगी। हालांकि, इसे अंतिम रूप देने के लिए केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की स्वीकृति आवश्यक है। इस योजना में यमुना के बाढ़ क्षेत्र, दिल्ली के 70 गांवों, पुराने DDA आवासों और मेट्रो से संबंधित कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं।
यमुना बाढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित परिवर्तन
नए मास्टर प्लान में यमुना फ्लडप्लेन को दो भागों O-1 और O-2 में विभाजित करने का प्रस्ताव है। O-1 क्षेत्र को मुख्य बाढ़ क्षेत्र माना जाएगा, जहां 25 वर्षों में आने वाली बाढ़ की सीमा के आधार पर कोई निर्माण नहीं किया जाएगा। O-2 क्षेत्र में पार्क और हरित क्षेत्र जैसी गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, DDA ने अभी तक इस क्षेत्र की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
दिल्ली के 70 गांवों में व्यावसायिक विकास
इस मास्टर प्लान का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू दिल्ली के 70 गांवों का विकास है। इन गांवों को ग्रीन डेवलपमेंट एरिया (GDA) के तहत विकसित करने की योजना है, जिसमें टिकरी कलां, मित्राऊं, ढांसा और महरौली जैसे क्षेत्र शामिल हैं। नई व्यवस्था के तहत इन गांवों में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी, जिससे पहले के प्रतिबंधों में ढील मिलेगी।
वर्टिकल विकास और सड़क नेटवर्क पर ध्यान
DDA का कहना है कि दिल्ली में भूमि की कमी के कारण, शहर को फैलाने के बजाय पहले से विकसित क्षेत्रों में अधिकतम उपयोग करना आवश्यक है। इसलिए, GDA क्षेत्रों में ऊंचाई वाली इमारतों और अधिक घनत्व वाले विकास को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही, सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए 12 मीटर, 18 मीटर और 30 मीटर चौड़ी सड़कों की योजना पर विचार किया जा रहा है।
पुराने DDA आवासों का पुनर्विकास
MPD-2047 के तहत, 50 साल पुराने DDA आवासों के पुनर्निर्माण के लिए नीति को मंजूरी दी गई है। कई आवासीय योजनाएं अब संरचनात्मक रूप से कमजोर हो चुकी हैं। DDA ने ऐसे आवासों के पुनर्विकास के लिए समान नीति को लागू करने का निर्णय लिया है।
नरेला में मेट्रो डिपो और अन्य बदलाव
DDA ने नरेला सब-सिटी में 19.63 हेक्टेयर भूमि के उपयोग में बदलाव किया है, जिससे रिठाला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर के लिए मेट्रो डिपो विकसित किया जा सकेगा। इसके अलावा, अन्य क्षेत्रों में भूमि उपयोग में बदलाव के प्रस्ताव भी हैं, जिन पर आगे सुझाव मांगे जाएंगे।
