Newzfatafatlogo

दिल्ली मास्टर प्लान 2047: राजधानी के विकास के लिए नया दृष्टिकोण

दिल्ली का नया मास्टर प्लान 2047, जो हाल ही में जारी किया गया है, राजधानी के विकास के लिए एक महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इस योजना में 2047 तक की जनसंख्या और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसे एक वैश्विक और समावेशी राजधानी बनाने का ब्लूप्रिंट बताया है। मास्टर प्लान में बुनियादी ढांचे के विकास, सार्वजनिक परिवहन के एकीकरण और औद्योगिक क्लस्टर के निर्माण पर जोर दिया गया है। यह योजना दिल्ली को आर्थिक विकास और नवाचार का केंद्र बनाने का लक्ष्य रखती है।
 | 

दिल्ली का नया मास्टर प्लान

दिल्ली: देश की राजधानी को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार विकसित करने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित मास्टर प्लान गुरुवार को जारी किया गया। प्रारंभ में, इस योजना का प्रारूप वर्ष 2041 की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया था, लेकिन अंत में इसे 2047 तक की अनुमानित 3.2 करोड़ की जनसंख्या और चुनौतियों के अनुसार अद्यतन किया गया है।


केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 'मास्टर प्लान दिल्ली 2047' (MPD-2047) का अनावरण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि यह मास्टर प्लान केवल एक शहरी विकास दस्तावेज नहीं है, बल्कि दिल्ली को एक वैश्विक, समावेशी, आर्थिक रूप से जीवंत और पर्यावरण के अनुकूल राजधानी बनाने का एक महत्वाकांक्षी ब्लूप्रिंट है।



केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि जब भारत अपनी आज़ादी की शताब्दी की ओर बढ़ रहा है, तब 'विकसित भारत @ 2047' के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने और दिल्ली को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने के लिए राजधानी पूरी तरह तैयार है।


दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार किया गया यह मास्टर प्लान लगभग 3.2 करोड़ की अनुमानित जनसंख्या को ध्यान में रखकर बनाया गया है। केंद्रीय मंत्री खट्टर ने स्पष्ट किया कि दिल्ली अब केवल प्रशासनिक केंद्र नहीं, बल्कि आर्थिक विकास और नवाचार का इंजन बनेगी। इस मास्टर प्लान का मूल मंत्र 'विकास-उन्मुख शहरी नियोजन' है, जो निवेश, नवाचार और रोजगार के नए द्वार खोलेगा।


MPD-2047 की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'इन्फ्रास्ट्रक्चर-लेड ग्रोथ मॉडल' है। इसका अर्थ है कि विकास वहां होगा, जहां बुनियादी ढांचा पहले से उपलब्ध है या विकसित किया जा रहा है। सड़कों, सार्वजनिक परिवहन, जलापूर्ति और डिजिटल कनेक्टिविटी को विकास का आधार बनाया गया है।

  • ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD): मास्टर प्लान में सार्वजनिक परिवहन और आवास को एकीकृत करने पर विशेष जोर दिया गया है। मेट्रो स्टेशनों और प्रमुख परिवहन गलियारों के आसपास सघन विकास किया जाएगा, ताकि लोग अपने कार्यस्थलों के करीब रह सकें और यात्रा का समय कम हो।
  • आर्थिक गलियारे और औद्योगिक क्लस्टर: दिल्ली को निवेश-सुलभ बनाने के लिए आधुनिक वाणिज्यिक जिले और औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। नरेला में 138 हेक्टेयर में फैला 'एजुकेशन हब' एक प्रमुख आकर्षण होगा, जो तकनीक और उद्यमिता का केंद्र बनेगा।