दिल्ली में CJP प्रदर्शन के दौरान हिंसा का खुलासा: पुलिस रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य
दिल्ली में हालिया हिंसा की सच्चाई
नई दिल्ली: हाल ही में दिल्ली की सड़कों पर हुई हिंसा के पीछे की कहानी अब सामने आई है। नीट परीक्षा विवाद के चलते न्याय की मांग के नाम पर कैसे शहर में उपद्रव की योजना बनाई गई, इस पर दिल्ली पुलिस ने एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं द्वारा छह दिनों तक पत्थरबाजी की गई, जिससे न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा, बल्कि छात्रों के बीच में घुसपैठ करने वाले खतरनाक अपराधियों की भी पहचान हुई है।
छात्रों के बीच उपद्रव की योजना
पुलिस की विस्तृत जांच में बताया गया है कि 20 जुलाई को जब संसद का सत्र चल रहा था, तब CJP ने संसद मार्च का आह्वान किया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन जंतर-मंतर पर जुटे छात्रों की भीड़ में कुछ राजनीतिक स्वार्थी तत्वों ने घुसपैठ कर ली और जानबूझकर हिंसा को बढ़ावा दिया। बार-बार चेतावनी देने के बावजूद जब उग्र भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़े और पत्थर फेंके, तब पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। अधिकारियों के अनुसार, यह बवाल 25 जुलाई तक तब शांत हुआ, जब तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग मान ली गई।
हिंसा का दायरा
यह हिंसा केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि उपद्रवियों ने संसद के 2 किलोमीटर के दायरे को युद्ध क्षेत्र में बदल दिया। रिपोर्टों के अनुसार, गोल डाक खाना, टॉल्स्टॉय-जनपथ क्रॉसिंग, रेल भवन के पास रफी मार्ग, जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस में जमकर पत्थरबाजी की गई। इसके अलावा, टॉल्स्टॉय-संसद मार्ग कॉरिडोर, एसबीआई बिल्डिंग और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के पास भी हिंसक घटनाएं हुईं।
सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान
इस हिंसक प्रदर्शन ने दिल्ली में व्यापक तबाही मचाई। उपद्रवियों ने 110 बैरिकेड्स, 171 रस्सियां, कई मेटल डिटेक्टर, लाउडहैलर और एक्स-रे बैग स्कैनर को नुकसान पहुंचाया। इसके साथ ही, पुलिस के 355 हेलमेट, 285 बॉडी प्रोटेक्टर्स और 54 शील्ड्स को भी नष्ट कर दिया गया। इस दौरान 29 सरकारी वाहनों, एक डीटीसी बस और वाटर टैंकर में भी भारी तोड़फोड़ की गई। इस पूरे घटनाक्रम में 244 पुलिसकर्मी और 209 आम नागरिक घायल हुए।
फेस रिकग्निशन तकनीक से खुलासा
दिल्ली पुलिस की आंतरिक रिपोर्ट ने इस मामले में चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। जब पुलिस ने हिंसा में शामिल चेहरों की पहचान के लिए फेस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग किया, तो कई अपराधियों की पहचान हुई। जांच में पता चला कि इस मार्च में 10 से अधिक ऐसे अपराधी शामिल थे, जिन पर हत्या जैसे गंभीर आरोप हैं। इसके अलावा, डकैती, यौन अपराध, आर्म्स एक्ट और नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले कई खतरनाक अपराधी भी इस भीड़ में शामिल थे।
