Newzfatafatlogo

दिल्ली में इमारत ढहने से बढ़ी चिंता, अध्ययन में जमीन धंसने का खतरा

दिल्ली के सत्य निकेतन में एक इमारत के गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद एक जनहित याचिका दायर की गई है। अध्ययन में बताया गया है कि दिल्ली, मुंबई, और चेन्नई जैसे महानगरों में जमीन धंसने का खतरा बढ़ रहा है। शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट डेटा का उपयोग करते हुए इन शहरों में धंसाव की दर का विश्लेषण किया है। यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में हजारों इमारतें उच्च खतरे की श्रेणी में आ सकती हैं।
 | 

दिल्ली में इमारत ढहने की घटना

दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को एक इमारत के गिरने से 7 लोगों की जान चली गई। इस घटना के बाद, दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें हादसे की जांच की मांग की गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह पता लगाया जाए कि यह हादसा क्यों हुआ। सत्य निकेतन के अलावा, विजय नगर, कमला नगर और करोल बाग जैसे क्षेत्रों में भी कई पुरानी इमारतें हैं, जो गिरने के कगार पर हैं, जबकि इन क्षेत्रों में सैकड़ों छात्र निवास करते हैं.


जर्जर इमारतों का खतरा

सत्य निकेतन में हुई इस घटना के बाद, दिल्ली के उन क्षेत्रों पर सवाल उठने लगे हैं, जहां जर्जर निर्माण हैं और जो हादसे के निकट हैं। चावड़ी बाजार में भी कई इमारतें हैं, जो मानकों के अनुसार नहीं बनी हैं और जिनके गिरने का खतरा अधिक है। केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य महानगर भी इस खतरे का सामना कर रहे हैं.


महानगरों में जमीन धंसने की समस्या

नेचर सस्टेनेबिलिटी जर्नल में प्रकाशित एक नई अध्ययन ने भारत के पांच प्रमुख महानगरों में जमीन धंसने और इमारतों को होने वाले संभावित नुकसान पर चिंता व्यक्त की है। शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट रडार डेटा का उपयोग करते हुए दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु और कोलकाता की 1.3 करोड़ इमारतों और 8 करोड़ लोगों का विश्लेषण किया।


धंसाव की दर

अध्ययन के अनुसार, इन शहरों में कुल 878 वर्ग किलोमीटर जमीन धंस रही है, जिससे लगभग 19 लाख लोग ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं, जहां हर साल 4 मिलीमीटर से अधिक की दर से जमीन नीचे जा रही है। वर्तमान में, दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में 2,406 इमारतें हैं, जिन्हें धंसाव के कारण ढांचागत नुकसान का उच्च खतरा है.


धंसाव की गति

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि सबसे तेज धंसाव दिल्ली में हो रहा है, जहां अधिकतम दर 51 मिलीमीटर प्रति वर्ष तक दर्ज की गई है। इसके बाद चेन्नई में 31.7 मिलीमीटर, मुंबई में 26.1 मिलीमीटर, कोलकाता में 16.4 मिलीमीटर और बेंगलुरु में 6.7 मिलीमीटर प्रति वर्ष की दर पाई गई है.


भविष्य में खतरा

शोधकर्ताओं ने मौजूदा धंसाव दर के आधार पर भविष्य के लिए अनुमान भी लगाए हैं। यदि यही धंसाव दर अगले 50 वर्षों तक जारी रहती है, तो दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता में कुल 23,529 इमारतें उच्च खतरे की श्रेणी में पहुंच सकती हैं.


जलवायु परिवर्तन और भूजल का प्रभाव

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि धंसाव की मुख्य वजह भूजल का अत्यधिक दोहन है। दिल्ली में जलोढ़ मिट्टी के दबने के कारण भूजल निकासी को जिम्मेदार ठहराया गया है, जबकि चेन्नई में अड्यार नदी के बाढ़ क्षेत्र की मिट्टी के दबने और भूजल दोहन दोनों को इसके लिए जिम्मेदार माना गया है.


1989 से 2023 तक के हादसे

अध्ययन में 1989 से 2023 के बीच मीडिया रिपोर्टों के आधार पर 26 इमारतों के गिरने की घटनाओं का उल्लेख किया गया है, जिसमें लगभग 351 लोगों की मौत और 320 लोग घायल हुए हैं. रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जमीन धंसने का इमारतों के गिरने से सीधा संबंध नहीं होता, लेकिन यह अन्य कारणों जैसे कमजोर निर्माण और रखरखाव की कमी को बढ़ा सकता है.