दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, CJP का मार्च जारी
सुप्रीम कोर्ट में छात्रों के खिलाफ FIR रद्द करने की याचिका
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने के लिए याचिका दायर की है। इस बात की जानकारी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दी। उन्होंने बताया कि FIR रद्द कराने के लिए अनुच्छेद 142 का सहारा लिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई मंगलवार को करेगा।
CJP का मार्च और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा दिल्ली में 5 सितंबर को होने वाले मार्च पर रोक लगाने की याचिका की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस मार्च से किसी अप्रिय घटना की संभावना नहीं है। उन्होंने प्रशासन से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की उम्मीद जताई।
CJP की मांगें और सरकार की प्रतिक्रिया
CJP ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने चार में से तीन मांगें पूरी नहीं की हैं। पार्टी ने X पर लिखा कि सरकार अधूरे वादों के साथ नहीं बच सकती। उनकी मांगों में छात्रों के परिवारों को मुआवजा, FIR वापस लेना और RAF तथा दिल्ली पुलिस से माफी मांगना शामिल है।
मार्च में शामिल होंगे सुसाइड करने वाले छात्रों के परिजन
5 सितंबर को होने वाला मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। इसमें उन छात्रों के परिजन भी शामिल होंगे, जिन्होंने NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या की थी। CJP ने कहा कि सरकार ने वादे किए थे, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए हाई पावर्ड कमेटी
20 जुलाई को CJP द्वारा संसद मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए 5 सदस्यों की हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया है, जिसमें पूर्व जज और पुलिस अधिकारी शामिल हैं।
