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दिल्ली में जंतर-मंतर को विरोध स्थल से हटाने का निर्णय, डिंपल यादव ने किया कड़ा विरोध

दिल्ली के जंतर-मंतर को अब विरोध प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा, जिससे समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि स्थान बदलने से जन जागरूकता नहीं रुक सकती। नए प्रदर्शन स्थलों की घोषणा के साथ, जानें इस निर्णय के पीछे की वजह और डिंपल यादव के विचार।
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जंतर-मंतर का विरोध स्थल के रूप में स्थानांतरण


जंतर-मंतर: नई दिल्ली के प्रसिद्ध जंतर-मंतर को अब विरोध प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा, क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे इस उद्देश्य से हटा दिया है। 1993 से यह स्थान संसद मार्ग और अशोक रोड के बीच प्रदर्शन का केंद्र रहा है। इस निर्णय पर समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।


मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव ने सोमवार को एक्स पर लिखा, "स्थान बदलने से जन जागरूकता नहीं रुक सकती। गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल का दर्जा छीन लिया है। यदि सरकार को लगता है कि किसी स्थान को बंद करने से वह आम आदमी की न्याय की आवाज़ को दबा सकती है, तो यह उनकी सबसे बड़ी गलती है। वोट चोरी, चंदा चोरी, पर्चा लीक, महंगाई, बेरोजगारी, बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ हर भारतीय की आवाज़ अब जंतर-मंतर बन चुकी है।"


डिंपल ने आगे लिखा, "हर चौपाल, हर नुक्कड़, हर पगडंडी, हर सड़क, हर गाँव, हर घर में जो लोग लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़े हैं, वे अब जंतर-मंतर हैं। चारों दिशाओं से यह स्पष्ट आवाज़ आती है कि सिंहासन ख़ाली करो, जनता आ रही है।"




दिल्ली में नए प्रदर्शन स्थलों की घोषणा


दिल्ली पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी एक बयान में बताया गया है कि जंतर-मंतर को अब विरोध प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसके स्थान पर तीन नए स्थलों को निर्धारित किया गया है, जिनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान (पूर्वी दिल्ली) शामिल हैं।


दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के अनुसार, गृह मंत्रालय ने नागरिकों के विरोध प्रदर्शन के अधिकार के लिए वैकल्पिक स्थलों की पहचान के लिए एक समिति का गठन किया था। समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को हटाया गया है।


बयान में यह भी कहा गया है कि इन नए स्थलों पर विरोध प्रदर्शन के लिए विस्तृत और संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी की जाएगी। यह 28.04.2022 के पिछले स्थायी आदेश में आंशिक संशोधन है।