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दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन: पुलिस ने दर्ज की FIR

दिल्ली में जंतर मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने तीन FIR दर्ज की हैं और लगभग 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया, जिसके चलते पुलिस ने कार्रवाई की। जानें इस मामले में आगे क्या हो सकता है और हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति क्या है।
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दिल्ली पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित जंतर मंतर प्रदर्शन के सिलसिले में तीन FIR दर्ज की हैं। ये मामले पार्लियामेंट स्ट्रीट और कनॉट प्लेस थानों में दर्ज किए गए हैं। यह प्रदर्शन विभिन्न छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के आह्वान पर हुआ, जिसमें लोग वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ सड़कों पर उतरे और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।


FIR का विवरण

अधिकारियों के अनुसार, FIR पुलिसकर्मियों की डेली डायरी एंट्री के आधार पर दर्ज की गई हैं। ये मामले भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के अंतर्गत हैं, जो लोक सेवक के आदेश की अवहेलना से संबंधित है। एक अधिकारी ने बताया कि FIR में संदिग्धों या आरोपियों के कॉलम में किसी व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं है।


प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

प्रदर्शन का आयोजन करने वाले संगठनों का उल्लेख FIR में किया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि FIR में BNS की अन्य धाराएं या अन्य कानून शामिल हैं या नहीं। प्रशासन ने जंतर मंतर के 5 किलोमीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू की थी, जिसके उल्लंघन का आरोप अब प्रदर्शनकारियों पर लगाया गया है।


धारा 163 का उल्लंघन

एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने जंतर मंतर पर बड़ी संख्या में एकत्र होकर प्रदर्शन किया, जिससे उन्होंने मध्य दिल्ली में पहले से लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया। यह निषेधाज्ञा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लगाई गई थी।


पुलिस का आदेश

पुलिस ने कहा कि जन सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और यातायात को बनाए रखने के लिए यह आदेश लागू किया गया है। इस आदेश के तहत बिना लिखित अनुमति के 5 या अधिक लोगों का एकत्र होना, जुलूस, प्रदर्शन, धरना, नारेबाजी और भाषण देना मना था।


संभावित कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के एक वकील के अनुसार, BNS की धारा 223 के तहत दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की साधारण कैद, 2,500 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यदि आदेश की अवहेलना से किसी की जान, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा हो या दंगे जैसी स्थिति उत्पन्न हो, तो एक साल तक की कैद, 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।


हिरासत में लिए गए लोग

रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को जंतर मंतर पहुंचने की कोशिश करने पर दिल्ली में लगभग 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन सुबह 11 बजे आयोजित किया गया था, जिसे AAP, AISA, SFI, NSUI, भारतीय युवा कांग्रेस और अन्य छात्र संगठनों ने बुलाया था।


सुरक्षा व्यवस्था

जंतर मंतर के आसपास लगभग 750 लोग हिरासत में लिए गए, जबकि दिल्ली के अन्य हिस्सों में करीब 400 लोगों को हिरासत में लिया गया। सुबह लगभग 200 लोगों को उनके घरों में नजरबंद किया गया। हिरासत में लिए गए लोगों को पुलिस की बसों से विभिन्न थानों में ले जाया गया।


भविष्य की योजनाएं

हिरासत में लिए गए लोगों में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और AAP नेता आतिशी भी शामिल हैं। AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा और स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव भी हिरासत में लिए गए। इसके अलावा, AAP नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्य और कांग्रेस की युवा इकाई के कार्यकर्ता भी हिरासत में लिए गए। कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्तूबर को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।