दिल्ली में पुरानी इमारत का ढहना: क्या भूकंप था कारण?
दिल्ली के न्यू सीमापुरी में इमारत ढही
बुधवार दोपहर को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के न्यू सीमापुरी में एक पुरानी चार मंजिला इमारत के ढहने से एक गंभीर घटना घटित हुई। यह इमारत ईदगाह मछली मंडी के निकट स्थित थी, और इसके गिरने से आस-पास के क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। घटना की जानकारी दिल्ली फायर सर्विस को लगभग 3:30 बजे मिली, जिसके बाद दमकल की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं। पुलिस, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नगर निगम, एनडीआरएफ और अन्य बचाव एजेंसियों ने राहत कार्य शुरू किया। अधिकारियों ने बताया कि कई घायलों को मलबे से निकालकर अस्पताल भेजा गया।
घायलों की संख्या में भिन्नता
देर शाम तक एक बच्चे की मौत की पुष्टि हुई और आठ अन्य घायल व्यक्तियों को मलबे से निकाला गया। हालांकि, प्रारंभिक रिपोर्टों में आंकड़ों में भिन्नता देखी गई, इसलिए अंतिम संख्या तब तक स्पष्ट नहीं हो सकेगी जब तक बचाव कार्य पूरा नहीं हो जाता।
भूकंप के बाद दरारों का दावा
स्थानीय निवासियों का कहना है कि मंगलवार रात उत्तराखंड में आए भूकंप के झटकों के बाद इस इमारत में दरारें दिखाई देने लगी थीं। उनके अनुसार, बुधवार को मकान मालिक इमारत को खाली करने का प्रयास कर रहा था, लेकिन इसी दौरान ढांचा अचानक गिर गया। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक भूकंप को इमारत के गिरने का मुख्य कारण नहीं बताया है। अधिकारियों का कहना है कि असली कारण की जांच के बाद ही पता चलेगा।
इमारत की उम्र और स्थिति
नगर निगम के अनुसार, यह इमारत लगभग 20 से 25 वर्ष पुरानी थी और इसे 225 वर्ग फुट के छोटे भूखंड पर बनाया गया था। घटनास्थल के आसपास की अन्य इमारतों को भी नुकसान पहुंचा, और पास की एक मस्जिद की चारदीवारी का एक हिस्सा भी प्रभावित हुआ। मलबा आसपास फैलने के कारण राहत कार्य में सावधानी बरतनी पड़ी।
मलबे में फंसे लोगों की आवाजें
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने राहत कार्य में मदद की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मलबे के भीतर कुछ लोगों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। इसी कारण बचावकर्मी भारी मलबा हटाते समय अतिरिक्त सावधानी बरत रहे थे, ताकि अंदर फंसे लोगों को कोई नुकसान न पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार, एक महिला के परिवार को फोन के जरिए उसके मलबे में फंसे होने की जानकारी मिली थी। परिजन लगातार बचाव दल से उसे बाहर निकालने की अपील करते रहे।
बचाव कार्य में कई एजेंसियों की भागीदारी
इमारत के गिरने की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस, एमसीडी, डीडीएमए और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। बड़े मलबे को हटाने के लिए मशीनों का उपयोग किया गया, जबकि कुछ हिस्सों को हाथ से भी साफ किया गया। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए मेडिकल टीमें भी मौके पर मौजूद थीं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने आसपास की सड़कों पर आवाजाही को लेकर लोगों को सावधानी बरतने और घटनास्थल के आसपास भीड़ न लगाने की सलाह दी, ताकि एंबुलेंस और बचाव वाहनों को रास्ता मिल सके।
पुरानी इमारतों की सुरक्षा पर सवाल
सीमापुरी की यह घटना उस समय हुई है जब दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे से पहले ढांचे में दरारें दिखाई देने लगी थीं। यदि जांच में यह दावा सही पाया जाता है, तो यह सवाल उठेगा कि कमजोर संरचना को समय पर खाली क्यों नहीं कराया गया और उसकी सुरक्षा जांच कितनी प्रभावी थी। फिलहाल प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों की तलाश और घायलों को उपचार दिलाना है। हादसे का अंतिम कारण और जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
