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दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प

दिल्ली के जंतर मंतर पर 66 दिनों के बाद फिर से प्रदर्शन शुरू हुआ, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारी उनके नामों का उल्लेख कर उन्हें निशाना बना रहे हैं। इस बीच, आईसा की नेता नेहा बोरा ने एक महिला पुलिसकर्मी पर ज्यादती का आरोप लगाया, जिससे मामला और गरमा गया। पुलिसकर्मियों ने अपने बैज उतारने का निर्णय लिया है, जिससे विवाद बढ़ गया है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और प्रतिक्रियाएं।
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जंतर मंतर पर फिर से प्रदर्शन


जंतर मंतर पर 66 दिनों के बाद एक बार फिर से प्रदर्शन शुरू हुआ, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें देखने को मिलीं। दोनों पक्ष अपनी-अपनी शिकायतें कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी उनके नामों का उल्लेख कर उन्हें निशाना बना रहे हैं। पुलिसकर्मियों के बैज पर लिखे नामों को पढ़कर प्रदर्शनकारी उन पर आरोप लगा रहे हैं, जिससे सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का खतरा बढ़ गया है।


इस दौरान, आईसा की नेता नेहा बोरा ने एक महिला पुलिसकर्मी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उसने ज्यादती की है। यह घटना मीडिया में चर्चा का विषय बन गई और सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।


इसके बाद, पुलिसकर्मियों ने अपने बैज उतारने का निर्णय लिया। अब जब वे प्रदर्शनकारियों को पकड़कर बस में बैठा रहे हैं, तो पहले अपने नाम हटा रहे हैं। इस पर नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने शिकायत की है। सीपीआई के सांसद पी संदेश कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इस मुद्दे की जानकारी दी है।


इससे पहले, जून और जुलाई में हुए प्रदर्शनों के दौरान, कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शिकायत की थी कि सादी वर्दी में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे, जो लोगों पर डंडे से हमला कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर विवाद भी हुआ था। इस बार, बिना बैज के पुलिसकर्मी तैनात हैं।