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दिल्ली में बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव

दिल्ली में बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक गतिविधियों का दौर जारी है। बीजेपी ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता मिटाओ' के तहत पदयात्रा का आयोजन किया, जबकि विपक्षी दल रामलीला मैदान में रैली कर रहे हैं। इस दौरान सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए कई नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। जानें इस राजनीतिक संघर्ष के पीछे की कहानी और नेताओं के बयानों का क्या महत्व है।
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राजनीतिक रैलियों का आयोजन

दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों की एक बड़ी रैली चल रही है, जबकि बीजेपी ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता मिटाओ' के तहत एक पदयात्रा का आयोजन किया है। इस पदयात्रा का नेतृत्व हरियाणा के रोहतक में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने किया। दिल्ली में हरिनगर से तिलक नगर मेट्रो स्टेशन तक भी यह यात्रा निकाली गई।


बीजेपी का बयान

बीजेपी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक संदेश साझा किया, जिसमें लिखा गया, '1 नवंबर 1984 को सिखों के नरसंहार ने पूरे देश को हिला दिया था। आज इस काली तारीख पर रैलियां आयोजित कर अपनी राजनीति चमकाने वालों को यह देश कभी माफ नहीं करेगा।'


मार्च में शामिल नेता

दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने इस मार्च में भाग लिया। ओडिशा के सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने फरीदाबाद में सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मार्च निकाला। चंडीगढ़ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 1 नवंबर और सिख विरोधी दंगों का उल्लेख किया, यह कहते हुए कि राजीव गांधी का बयान भुलाया नहीं जा सकता।


नितिन नबीन का बयान

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने रोहतक में पदयात्रा के दौरान कहा कि आज ही के दिन सिख विरोधी दंगे हुए थे और राहुल गांधी को इस पर माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। इस यात्रा में स्मृति ईरानी और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी भी शामिल हुए।


फडणवीस का आरोप

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ठाणे में लोकतंत्र बचाओ मार्च में भाग लिया। उन्होंने कांग्रेस पर आपातकाल के दौरान 'संविधान की चोरी' का आरोप लगाया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय ताकतें और सोशल मीडिया एल्गोरिदम देश में अराजकता फैलाने के लिए गलत सूचनाएं फैला रहे हैं। फडणवीस ने कहा, 'जो लोग 'वोट चोरी' का शोर मचाते हैं, वे असल में संविधान के चोर हैं।'


राहुल गांधी पर हर्ष मल्होत्रा की टिप्पणी

दिल्ली में सीएम रेखा गुप्ता और प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने पदयात्रा का नेतृत्व किया। मल्होत्रा ने कहा, 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि 42 साल पहले 1, 2 और 3 नवंबर 1984 को सिखों का नरसंहार हुआ था। इसे कांग्रेस नेताओं ने अंजाम दिया था। माफी मांगने के बजाय, कांग्रेस ने राजीव गांधी के माध्यम से यह टिप्पणी की थी कि 'जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है।' आज राहुल गांधी भी वही बात दोहरा रहे हैं। रामलीला मैदान में रैली करके, वे यह संकेत दे रहे हैं कि उन्हें कोई पछतावा नहीं है। वे वास्तव में सिख समुदाय के जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं।