दिल्ली में मतदाता सूची के लिए समयसीमा बढ़ी, चुनाव आयोग ने लिए महत्वपूर्ण निर्णय
दिल्ली SIR की नई अपडेट
दिल्ली SIR की ताजा जानकारी: दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने शनिवार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। आयोग ने SIR से संबंधित अपने निर्णयों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया और नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं के लिए सत्यापन प्रक्रिया को सरल बनाने की घोषणा की। सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह है कि दिल्ली में दावे और आपत्तियों की समयसीमा 30 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है। इन दावों और आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तिथि अब 30 नवंबर होगी।
नोटिस प्राप्त करने वालों के लिए राहत
चुनाव आयोग के अनुसार, जिन मतदाताओं को SIR के दौरान 'अनमैप्ड' या 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के आधार पर नोटिस मिला है, उन्हें आमतौर पर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे मतदाताओं के घर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे। ये दस्तावेज ECINet पर अपलोड किए जाएंगे और उनके आधार पर ERO आगे निर्णय लेंगे। आयोग ने कहा कि केवल विशेष मामलों में ही व्यक्तिगत सुनवाई की आवश्यकता होगी। जहां संभव होगा, सुनवाई ऑनलाइन होगी। कुछ मामलों में मतदाता के परिवार का कोई सदस्य भी शामिल हो सकेगा।
बेघर लोगों के लिए विशेष सहायता
आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार हेल्प डेस्क और विशेष कैंप स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इनका उद्देश्य मजदूरों, गरीबों, बेघर लोगों और नाइट शेल्टर में रहने वाले व्यक्तियों तक पहुंच बनाना है, ताकि SIR की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं को दस्तावेज और आवेदन से संबंधित सहायता मिल सके। पहले दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 30 सितंबर थी, जिसे अब बढ़ाकर 30 अक्टूबर कर दिया गया है।
नाम छूटने पर क्या करें?
यदि SIR के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, तो वह संबंधित ERO के पास दावा दाखिल कर सकता है। आयोग ने अधिकारियों को विशेष नामांकन अभियान चलाने के निर्देश भी दिए हैं, जिसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं को अपना नाम जुड़वाने का अवसर प्रदान करना है।
ECINet की समीक्षा
SIR को लेकर ECINet और चुनाव आयोग के IT सिस्टम पर उठे सवालों के बीच आयोग ने सिस्टम की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने का निर्णय लिया है। समिति की अध्यक्षता वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर करेंगे और इसमें IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। ECI ने कहा कि फील्ड अधिकारियों को उनके कानूनी अधिकारों के अनुसार ECINet में रोल-बेस्ड एक्सेस दिया जाता है। आयोग ने IT से जुड़े प्रशासनिक विवाद को भी नीतिगत मतभेद से अलग बताया।
SIR पर सर्वसम्मति का दावा
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि SIR से जुड़े निर्णय पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब हाल ही में SIR की प्रक्रिया और ECINet को लेकर आयोग के भीतर मतभेदों की रिपोर्ट सामने आई थी। दिल्ली में SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ECI से जवाब मांगा था। अदालत ने कुछ नोटिसों को पहली नजर में 'मैकेनिकल' बताया था।
महाराष्ट्र में भी समयसीमा बढ़ी
दिल्ली के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी समयसीमा बढ़ाई गई है। वहां दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 12 अक्टूबर और उनके निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर तक की गई है। ECI के निर्णयों से दिल्ली के उन मतदाताओं को अतिरिक्त समय और प्रक्रिया में राहत मिली है, जिन्हें SIR के दौरान अपने रिकॉर्ड को लेकर नोटिस मिला है या जिनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है।
