दिल्ली में ममता बनर्जी और AAP नेताओं की गिरफ्तारी से राजनीतिक हलचल
दिल्ली में राजनीतिक तनाव बढ़ा
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में राजनीतिक गतिविधियों में अचानक उबाल आ गया, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल को पुलिस ने हिरासत में लिया। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) द्वारा साउथ एवेन्यू में विरोध प्रदर्शन के दौरान की गई। हिरासत में लिए जाने के बाद सभी नेताओं को प्रिजन वैन में बैठाकर विभिन्न पुलिस थानों में भेजा गया।
टीएमसी सांसदों की गिरफ्तारी
ममता बनर्जी के साथ कई टीएमसी सांसद भी हिरासत में
साउथ एवेन्यू में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान, ममता बनर्जी के अलावा तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ सांसदों को भी हिरासत में लिया गया। इनमें राज्यसभा में टीएमसी के नेता डेरेक ओ'ब्रायन, डोला सेन, प्रतिमा मंडल और समीरुल इस्लाम शामिल हैं। पुलिस ने धारा 144 का हवाला देते हुए सभी नेताओं को तुरंत प्रदर्शन स्थल से हटाया।
AAP नेताओं की गिरफ्तारी और प्रतिक्रिया
अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं की गिरफ्तारी
ममता बनर्जी की गिरफ्तारी के साथ ही, दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं पर भी कार्रवाई की। अरविंद केजरीवाल को पुलिस ने संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और विधायक दुर्गेश पाठक के साथ हिरासत में लिया।
गिरफ्तारी के तुरंत बाद, केजरीवाल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए लिखा कि वे 'मोदी जी की तानाशाही से डरने वाले नहीं हैं' और जनता के अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
टीएमसी का केंद्र सरकार पर हमला
‘लोकतंत्र के लिए काला दिन’
हिरासत की कार्रवाई के बाद, तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। पार्टी ने सवाल उठाया कि किसी जीवंत लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले चुने हुए जन प्रतिनिधियों को गिरफ्तार करना कब से सामान्य हो गया है। टीएमसी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत के रास्ते खोलने के बजाय शांतिपूर्ण विरोध को कुचलने के लिए गिरफ्तारी का सहारा लेना गंभीर सवाल खड़ा करता है।
टीएमसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष चाहे जितनी भी हदें पार कर ले, कोई भी सरकार जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकती। पार्टी ने इस दिन को 'लोकतंत्र के लिए काला दिन' करार देते हुए संकल्प लिया कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की यह लड़ाई जारी रहेगी।
