दिल्ली में यमुना नदी की सफाई: स्थिति और चुनौतियाँ
यमुना सफाई की स्थिति
दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत के बाद, 20 फरवरी 2025 को रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके कुछ ही दिनों बाद यमुना नदी में कई मशीनें उतारी गईं और नालों की डीसिल्टिंग का कार्य शुरू हुआ। अतिरिक्त मुख्य सचिव नवीन कुमार चौधरी ने कहा था कि 2027 से पहले नदी को साफ करने का प्रयास किया जाएगा। हाल ही में, 18 अक्टूबर को 'चलो यमुना अभियान' के तहत दिल्ली सरकार के मंत्रियों ने कहा कि सफाई में अगले ढाई साल का समय लगेगा। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के आंकड़ों के अनुसार, नदी के पानी की गुणवत्ता में केवल मामूली सुधार हुआ है।
यमुना के पानी की गुणवत्ता
दिल्ली में यमुना नदी के प्रदूषण की स्थिति की हर महीने जांच होती है, और इसके आंकड़े DPCC की वेबसाइट पर उपलब्ध होते हैं। सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, यमुना का पानी न तो पीने योग्य है और न ही स्नान के लिए। यहां तक कि इसे छूने पर भी त्वचा में खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पिछले साल की तुलना में, पानी की गुणवत्ता में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है।
AAP का बीजेपी पर हमला
विपक्षी आम आदमी पार्टी ने 18 अक्टूबर को एक वीडियो साझा किया, जिसमें कालिंदी कुंज घाट पर झाग दिखाई दे रहा है। पार्टी ने लिखा, 'रेखा गुप्ता जी ने तो ज़मीन पर बादल ही उतार दिए। क्या ऐसा विकास देखा है?' दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि रेखा गुप्ता ने पिछले साल दावा किया था कि 'यमुना साफ़ हो गई', लेकिन आज यमुना का पानी काला दिख रहा है।
पानी की गुणवत्ता के मानक
पानी की pH वैल्यू 6.5 से 8.5 के बीच होनी चाहिए। पिछले साल सितंबर में, दिल्ली के सभी स्थानों पर पानी की pH मानक के अनुसार थी। इस साल भी सभी जगहों पर pH वैल्यू मानक के अनुसार है।
BOD: बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) यह दर्शाती है कि पानी में कार्बनिक पदार्थों को तोड़ने के लिए कितनी ऑक्सीजन की आवश्यकता है। पिछले साल सितंबर में, पल्ला में BOD 2.5, वजीराबाद में 3.5 और ISBT पर 8 था। इस साल पल्ला में BOD 2.0 है, जबकि वजीराबाद में यह 4.0 है।
ऑक्सीजन और फीकल कोलीफॉर्म की स्थिति
DO: डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन (DO) का मानक 5 मिलीग्राम होना चाहिए। पिछले साल सितंबर में, पल्ला में DO 9.5 था, लेकिन इस साल यह 6.5 है।
फीकल कोलीफॉर्म: पानी में फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा पिछले साल पल्ला में 790 थी, जबकि इस साल यह 1100 हो गई है। वजीराबाद में यह 1300 है, और ISBT ब्रिज पर 35000 तक पहुंच गई है।
निष्कर्ष
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले साल के सितंबर की तुलना में इस साल भी पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है। BOD की मात्रा अधिक है और DO की मात्रा मानक से कम है। अब यह देखना होगा कि दिल्ली और केंद्र सरकार इन समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाती है।
