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दिल्ली में यमुना नदी में नहाते समय चार किशोर बह गए, एक दोस्त बना गवाह

दिल्ली के हिरणकी गांव में यमुना नदी में नहाते समय चार किशोर तेज बहाव में बह गए। उनका एक साथी किनारे पर खड़ा रहा और उसने घटना की पूरी कहानी सुनाई। बचाव कार्य में देरी के आरोपों के बीच, पुलिस और अन्य एजेंसियां बच्चों की तलाश में जुटी हैं। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक की लहर फैला दी है।
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दिल्ली के हिरणकी गांव में हुआ दर्दनाक हादसा

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के आउटर नॉर्थ जिले के अलीपुर थाना क्षेत्र में स्थित हिरणकी गांव में रविवार शाम को एक गंभीर घटना घटी। यमुना नदी में नहाने गए एक ही स्कूल के चार किशोर तेज बहाव में बह गए, जबकि उनका एक साथी किनारे पर खड़ा रहा। घटना के बाद से पुलिस, डीडीएमए और दमकल विभाग की टीमें बच्चों की खोज में जुटी हैं, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है।


नदी में नहाने गए चार छात्र बह गए

रविवार शाम लगभग चार बजे, पांच दोस्त हिरणकी गांव के पास यमुना नदी के 24 नंबर ठोकर पर पहुंचे। कपड़े गंदे होने के बाद चार बच्चों ने नदी में नहाने का निर्णय लिया, जबकि उनका पांचवां साथी लकी किनारे पर ही बैठा रहा।


जैसे ही अंशु, सौरभ, राहुल और अमनदीप नदी में उतरे, वे तेज बहाव में फंस गए। यह देखकर लकी ने शोर मचाया और मदद के लिए लोगों को बुलाया, लेकिन तब तक चारों बच्चे गहरे पानी में बह चुके थे।


लकी ने सुनाई घटना की पूरी कहानी

लकी, जो इस घटना का एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी है, ने बताया कि सभी दोस्त यमुना किनारे घूमने गए थे। नहाने के दौरान वह खुद नदी में नहीं उतरा, जबकि बाकी चार बच्चे पानी में चले गए और कुछ ही क्षणों में तेज बहाव में फंस गए। उसने तुरंत मदद के लिए आवाज लगाई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।


रातभर चला सर्च ऑपरेशन

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (डीडीएमए) और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। रात भर सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन अंधेरे के कारण अभियान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। सोमवार सुबह फिर से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया और बच्चों की तलाश जारी है।


चारों छात्र एक ही स्कूल के हैं

जानकारी के अनुसार, चारों बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ते थे और उनकी उम्र 14 से 15 वर्ष के बीच है। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक की लहर फैला दी है।


परिजनों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया

घटना के बाद बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने प्रशासन पर राहत एवं बचाव कार्य में देरी का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि यदि बचाव दल समय पर पहुंच जाता, तो शायद बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।


फिलहाल पुलिस और बचाव एजेंसियां लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। पूरे हिरणकी गांव में मातम पसरा हुआ है और लोग बच्चों के सकुशल लौटने की प्रार्थना कर रहे हैं।