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दिल्ली में युवा प्रदर्शन: एक नई राजनीतिक चेतना का उदय

दिल्ली में हाल ही में हुए युवा प्रदर्शन ने एक नई राजनीतिक चेतना को जन्म दिया है। छात्रों ने अपनी आवाज़ उठाते हुए सरकार को चुनौती दी और अपने अधिकारों की मांग की। इस आंदोलन में देश के विभिन्न हिस्सों से युवा शामिल हुए, जिन्होंने अपने गुस्से और उम्मीदों को साझा किया। जानिए कैसे इस प्रदर्शन ने दिल्ली की सड़कों पर एक नई ऊर्जा का संचार किया और युवाओं ने अपनी ताकत का एहसास कराया।
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नई दिल्ली में युवा आंदोलन की गूंज


सोमवार की सुबह मैंने यह धारणा बनाई थी कि भारत की जेनरेशन-ज़ेड राजनीति के प्रति उदासीन है, लेकिन नई दिल्ली की सड़कों ने मुझे गलत साबित कर दिया। चार परतों की बैरिकेडिंग, रैपिड एक्शन फोर्स, सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस के हजारों जवानों के बावजूद, युवाओं का जनसैलाब अद्भुत था। मैंने सोचा था कि सरकार ने प्रदर्शन को विफल कर दिया है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को अब यह समझ आ गया होगा कि युवा पीढ़ी, जिसे वे 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' मानते थे, अब गुस्से में है।


सुबह 10:30 बजे से शाम 5 बजे तक, मैंने संसद भवन, रिजर्व बैंक, जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर उस युवा जोश का सामना किया, जिसमें लड़कियाँ भी शामिल थीं। वे न केवल पुलिस से भिड़ रही थीं, बल्कि मीडिया से भी बेबाकी से बात कर रही थीं।


यह दिन अन्ना आंदोलन या निर्भया आंदोलन के समय से भिन्न था। मौसम उमस भरा था, लेकिन युवाओं का उत्साह कहीं अधिक था। जंतर-मंतर की ओर जाने वाली हर सड़क छात्रों और युवाओं से भरी थी। नारे गूंज रहे थे, और जोश साफ महसूस हो रहा था।


प्रदर्शन में केवल दिल्ली के युवा नहीं थे; देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र आए थे। मैंने जयपुर से आए कुछ युवाओं से मुलाकात की, जो केवल मार्च में शामिल होने नहीं, बल्कि एकजुटता दिखाने आए थे।


रागिनी नाम की एक छात्रा ने बताया कि जिस मास्टर्स कोर्स में वह दाखिला लेना चाहती है, उसमें सामान्य वर्ग के लिए केवल 18 सीटें बची हैं। उसने कहा, "ग्रेजुएट होकर भी सिर्फ़ बारह हजार कमाऊंगी?" यह सवाल पूरे प्रदर्शन में गूंज रहा था।


प्रदर्शन में शामिल छात्रों में इंजीनियर, डिजाइनर, एमबीए के छात्र और युवा किसान शामिल थे। कई छात्र पहली बार दिल्ली आए थे।


हिमांशी नाम की एक छात्रा ने आंसू गैस के गोले छोड़े जाने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। उसने और उसकी सहेलियों ने भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग पर खुलकर सवाल उठाए।


प्रदर्शन में गुस्सा था, लेकिन अराजकता नहीं। नारों की लहरें उठती थीं, और अचानक पुलिस का लाठीचार्ज हुआ। लेकिन कुछ ही मिनटों बाद, छात्र फिर से एकजुट हो गए।


सोमवार को युवाओं की आवाज़ ने साफ संकेत दिया कि वे अब सत्ता से सीधे जवाब मांग रहे हैं। पोस्टरों पर लिखा था, "हम बोलते हैं क्योंकि हम अपने देश से प्यार करते हैं।"


यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि यह किसी बड़े मोड़ का संकेत है, लेकिन यह स्पष्ट है कि भारत की जेनरेशन-ज़ेड अब राजनीति से उदासीन नहीं है।