दिल्ली में सर्वदलीय बैठक में एनसीपीआई को शामिल करने पर विपक्ष का विरोध
सर्वदलीय बैठक का आयोजन
दिल्ली में आज संसद के मानसून सत्र से पहले सरकार ने सभी राजनीतिक दलों के लिए एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया। जैसे ही बैठक शुरू हुई, विपक्षी दलों ने कुछ समय के लिए इसका बहिष्कार किया। इसका कारण यह था कि सरकार ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) को भी इस बैठक में आमंत्रित किया था, जिससे विपक्षी दल नाराज हो गए।
विपक्ष का आरोप
विपक्ष का कहना है कि जिस पार्टी को अभी तक आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है, उसे बैठक में बुलाना उचित नहीं है। इसी कारण उन्होंने कुछ समय के लिए बैठक का बहिष्कार किया, लेकिन यह वॉकआउट केवल प्रतीकात्मक था। बाद में विपक्षी सांसद फिर से बैठक में शामिल हो गए।
बैठक में हंगामा
इस बैठक की अध्यक्षता राजनाथ सिंह कर रहे थे, जिसमें कांग्रेस, सपा, टीएमसी, DMK सहित 10 से अधिक विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। विपक्ष ने एनसीपीआई को बुलाने का विरोध किया, यह सवाल उठाते हुए कि सरकार ने टीएमसी के बागी 20 सांसदों के समूह को बैठक में क्यों आमंत्रित किया, जिसे स्पीकर ओम बिरला ने अभी तक मान्यता नहीं दी है।
सौगत रॉय और काकोली घोष की प्रतिक्रिया
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि जिस पार्टी को अभी तक आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है, उसे सर्वदलीय बैठक में बुलाना अनुचित है। कांग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी ने भी इसका विरोध किया और कहा कि इसी कारण विपक्ष ने कुछ समय के लिए बैठक का प्रतीकात्मक बहिष्कार किया। दूसरी ओर, एनसीपीआई की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सरकार का धन्यवाद किया और कहा कि किसी भी पार्टी के विलय की प्रक्रिया में समय लगता है।
संसदीय कार्य मंत्री की अपील
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से संसद के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद सभी के लिए है और हंगामे से किसी को लाभ नहीं होगा।
महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा, जिसमें 19 बैठकें होंगी। आज की बैठक में विपक्ष ने कहा कि वह मानसून सत्र के दौरान नीट पेपर लीक, किसानों के मुद्दे, राम मंदिर चंदा घोटाला, पेट्रोल में ई-20 मिश्रण और परिसीमन जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाएगा।
