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दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल की अनिवार्यता की मांग, हाईकोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पीजी इमारत के ढहने से हुई दुखद घटनाओं के बाद, दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल की अनिवार्यता की मांग उठी है। हालांकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने पहले से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की बात कही है। इस घटना ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में आवासीय सुविधाओं की कमी को उजागर किया है, जिससे छात्रों को महंगे और असुरक्षित निजी पीजी में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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सत्य निकेतन हादसे के बाद की स्थिति

नई दिल्ली: सत्य निकेतन क्षेत्र में एक पांच मंजिला पीजी इमारत के ढहने से पांच छात्रों समेत सात लोगों की दुखद मृत्यु के बाद, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के सभी कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधा अनिवार्य करने की मांग अब अदालत तक पहुंच गई है। हालांकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को इस मामले से संबंधित नई याचिका पर त्वरित सुनवाई करने से मना कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस गंभीर मुद्दे पर पहले से ही एक जनहित याचिका (PIL) दायर की जा चुकी है, जिस पर बुधवार, 9 सितंबर को सुनवाई होगी।


चीफ जस्टिस की स्पष्टता

‘कल आएगी PIL, न करें समय बर्बाद’: चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ के समक्ष जब वकील ने याचिका को मंगलवार को ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, तो अदालत ने सख्त रुख अपनाया। बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि पहले से दायर पीआईएल अगले दिन स्वतः सूचीबद्ध हो जाएगी, इसलिए बिना कारण अदालत का समय बर्बाद न करें। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या अंतरिम निर्देश के माध्यम से रातों-रात ऐसा व्यापक आदेश जारी किया जा सकता है।


हॉस्टल की कमी और अनियंत्रित पीजी कारोबार

कैंपस में हॉस्टलों की भारी किल्लत: सत्य निकेतन में हुए हादसे ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में आवासीय सुविधाओं की कमी को एक बार फिर उजागर किया है। डीयू के कई कॉलेजों में छात्रों के लिए उचित और किफायती हॉस्टल उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण देशभर से आने वाले हजारों छात्र महंगे और असुरक्षित निजी पीजी में रहने को मजबूर हैं। छात्रों की इस मजबूरी के कारण राष्ट्रीय राजधानी में बिना आवश्यक सुरक्षा मानकों और संरचनात्मक ऑडिट के पेइंग गेस्ट का अवैध कारोबार तेजी से बढ़ रहा है।


MCD को जांच के आदेश

MCD को पहले ही मिल चुके हैं हाई-लेवल जांच के आदेश: इससे पहले, दिल्ली उच्च न्यायालय ने सत्य निकेतन हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) को उच्चस्तरीय जांच के सख्त निर्देश दिए थे। अदालत ने एमसीडी से स्पष्ट रिपोर्ट पेश करने को कहा है कि क्या ढही हुई इमारत का निर्माण और उसमें पीजी का संचालन वैधानिक मंजूरियों के तहत हो रहा था या यह नियमों की खुली अनदेखी का मामला है। प्रशासन अब मामले की जवाबदेही तय करने में जुटा हुआ है।