दिल्ली हाई कोर्ट ने तुर्कमेन महिला की वीजा याचिका खारिज की
दिल्ली हाई कोर्ट का निर्णय
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में तुर्कमेनिस्तान की एक महिला द्वारा दायर वीजा से संबंधित याचिका को खारिज कर दिया। महिला के पास भारत का वैध बिजनेस वीजा था, लेकिन जब वह अपने पति के साथ दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंची, तो उसे रोक दिया गया। उसे उसी दिन तुर्कमेनिस्तान वापस भेज दिया गया, जबकि उसके पति को भारत में प्रवेश की अनुमति दी गई। कोर्ट ने इस याचिका को बेबुनियाद मानते हुए खारिज कर दिया और कहा कि वीजा मिलने से भारत में प्रवेश का अधिकार नहीं मिलता।
याचिका का विवरण
महिला ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा कि उसे भारत में प्रवेश से रोकने का कारण नहीं बताया गया। उसने यह भी तर्क किया कि जब उसके पति को उसी फ्लाइट से भारत आने दिया गया, तो उसे रोकना अनुचित है, जो कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 (बराबरी) और 21 का उल्लंघन है।
मामले की पृष्ठभूमि
जस्टिस अमित महाजन ने 30 सितंबर 2026 को केस W.P.(C) 5740/2026 में फैसला सुनाया। अन्नागुरबानोवा तुर्कमेनिस्तान की नागरिक हैं, जिनके पास भारतीय दूतावास अश्गाबात द्वारा जारी बिजनेस वीजा था। महिला 25 मार्च 2026 को अपने पति के साथ दिल्ली एयरपोर्ट पहुंची। जबकि पति को एंट्री मिल गई, महिला को इमिग्रेशन काउंटर पर रोककर वापस भेज दिया गया। महिला ने आरोप लगाया कि उसे कोई लिखित कारण नहीं दिया गया।
सरकार का पक्ष
सरकार ने बताया कि महिला ने 2025 में भारत के 47 दौरे किए, जिनमें से अधिकांश 1 से 3 दिन के थे। उसने बिजनेस और मेडिकल वीजा पर यात्रा की। 2018 से 2024 तक उसने मेडिकल वीजा पर लगभग 24 दौरे किए। इसके अलावा, नवंबर 2024 से दिसंबर 2025 तक बिजनेस वीजा पर कुल 53 दौरे किए। महिला ने माता-पिता और जीवनसाथी के विवरण में गड़बड़ी की थी।
कोर्ट का निर्णय
जस्टिस अमित महाजन ने सुनवाई के दौरान कहा कि वीजा जारी करना या एंट्री से मना करना राज्य का एक सॉवरेन कार्य है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि इमिग्रेशन ऑफिसर को किसी विदेशी के पासपोर्ट और वीजा की जांच करने का अधिकार है। इसलिए, वीजा होना भारत में प्रवेश का पूर्ण अधिकार नहीं है।
कानूनी ढांचे के अनुसार, इमिग्रेशन ऑफिसर को आवश्यक जानकारी मांगने का अधिकार है। इसलिए, वीजा होने से भारत में प्रवेश का अधिकार नहीं मिलता। दिल्ली हाई कोर्ट
कोर्ट ने यह भी कहा कि इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 3 के तहत भारत में प्रवेश के लिए विदेशी के पास वैध पासपोर्ट और वीजा होना आवश्यक है। हालांकि, कुछ स्थितियों में दस्तावेज पूरे होने पर भी एंट्री रोकी जा सकती है, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की संप्रभुता।
