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दिल्ली हाई कोर्ट में स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी पर सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट में स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। भारद्वाज को 4 सितंबर को बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया था और उन्हें 21 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। सुनवाई के दौरान, वकील ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और FIR की वैधता पर बहस हुई। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और क्या है आगे की प्रक्रिया।
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स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी का मामला


स्वतंत्र भारद्वाज को 4 सितंबर को बुलंदशहर से हिरासत में लेकर दिल्ली लाया गया। एक दिन की पुलिस हिरासत के बाद उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 21 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।


हाई कोर्ट में FIR पर बहस

सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में भारद्वाज की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। उनके वकील ने कहा कि दिल्ली पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए बुलंदशहर गई थी। हालांकि, पुलिस ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की FIR को रद्द नहीं किया है। हाई कोर्ट ने पुलिस से स्पष्ट जवाब मांगा कि क्या संबंधित FIR अभी भी लागू है और तुरंत हलफनामा या बयान देने का निर्देश दिया।


न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की प्रक्रिया

4 सितंबर को गिरफ्तार होने के बाद भारद्वाज को दिल्ली लाया गया। 5 सितंबर को अदालत ने पुलिस को एक दिन की पूछताछ की अनुमति दी। हिरासत समाप्त होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। सोमवार को उन्हें तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विशेष जज सौरभ प्रताप सिंह लालर के समक्ष पेश किया गया, जहां अदालत ने संजय आजाद पर 23 जून को हुए कथित हमले के मामले में उनकी न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ाकर 21 सितंबर तक कर दी।


वीडियो पॉडकास्ट के बाद विवाद की शुरुआत

यह कार्रवाई एक वीडियो पॉडकास्ट में दिए गए कथित बयान के बाद हुई, जिसमें भारद्वाज ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान आजाद का सिर फोड़ने का दावा किया था। उन्होंने बाद में कहा कि यह आत्मरक्षा में किया गया था। पुलिस के अनुसार, आजाद को लगी चोट मामूली थी और यह स्टील के ब्रेसलेट से लगी थी। FIR में SC/ST एक्ट और आपराधिक धमकी की धाराएं जोड़ी गईं, और एक किशोर कार्यकर्ता की शिकायत पर POCSO एक्ट के तहत अलग FIR भी दर्ज की गई।