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दिल्ली हाईकोर्ट ने पीएम मोदी के डीपफेक फोटो मामले में सख्त कदम उठाए

दिल्ली हाईकोर्ट ने पीएम मोदी के साथ एक महिला की AI द्वारा बनाई गई आपत्तिजनक तस्वीर के मामले में सख्त कदम उठाए हैं। अदालत ने दिल्ली पुलिस को महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सोशल मीडिया पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, CJP से जुड़े चार व्यक्तियों को नोटिस भी जारी किया गया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के आदेशों के बारे में।
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दिल्ली हाईकोर्ट का सख्त रुख

पीएम मोदी के साथ एक महिला की AI द्वारा निर्मित आपत्तिजनक तस्वीर के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता महिला को सुरक्षा प्रदान करे। इसके साथ ही, कोर्ट ने सोशल मीडिया पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का आदेश भी दिया। अदालत ने Meta से कहा कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर संबंधित सामग्री को तुरंत हटाए। इस मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं को भी नोटिस जारी किया गया है।


Meta को सामग्री हटाने का आदेश

अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब जांच एजेंसी संबंधित वेब लिंक प्रदान करेगी, तब Meta को तुरंत सामग्री हटानी होगी। यह मामला उन मॉर्फ की गई तस्वीरों से संबंधित है, जिन्हें सोशल मीडिया पर फैलाने का आरोप है। महिला ने अदालत में याचिका दायर कर सामग्री को हटाने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी।


एक सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट की मांग

दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को FIR पर की गई कार्रवाई का पूरा विवरण एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, महिला को दी गई सुरक्षा और उठाए गए सुरक्षा उपायों की जानकारी देने के लिए पुलिस को दो सप्ताह के भीतर एक और स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी। याचिका में महिला ने आरोप लगाया है कि मॉर्फ की गई तस्वीरों के प्रसार के बाद उसे धमकियों का सामना करना पड़ा।


CJP से जुड़े चार लोगों को नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने CJP से जुड़े चार व्यक्तियों- अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह को नोटिस जारी किया है। इन चारों को याचिका में निजी प्रतिवादी बनाया गया है। अदालत के निर्देशों के अनुसार, दिल्ली पुलिस को महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ FIR की जांच में हुई प्रगति की जानकारी अदालत के सामने रखनी होगी।