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दिवाली पर प्रदूषण कम करने के लिए ग्रीन दिवाली अभियान की पहल

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने दिवाली के दौरान प्रदूषण को कम करने के लिए ग्रीन दिवाली अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को पटाखे न जलाने और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को अपनाने के लिए जागरूक करना है। दिल्ली में पिछले वर्षों के AQI आंकड़े प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों की अनुमति दी, लेकिन प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। जानें इस विषय पर और क्या जानकारी है।
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ग्रीन दिवाली का महत्व

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए कई वर्षों से ग्रीन दिवाली जैसे जागरूकता अभियानों का संचालन किया है। 2017 में मंत्रालय ने 'हरित दिवाली, स्वस्थ दिवाली' नामक अभियान की शुरुआत की, जिसमें बच्चों से अपील की गई कि वे पटाखे न जलाएं और प्रदूषण को कम करने में योगदान दें। 2018 में इस मुहिम को 'ग्रीन गुड डीड' से जोड़ा गया, जिससे पर्यावरण के अनुकूल दिवाली मनाने के लिए जागरूकता बढ़ाई गई।


2026 का ग्रीन दिवाली अभियान

2026 में, मंत्रालय ने वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर-इंडिया (WWF-India) के EIACP कार्यक्रम के तहत 20 अक्टूबर से 8 नवंबर तक एक देशव्यापी 'ग्रीन दिवाली' अभियान की योजना बनाई है। EIACP का मतलब है एनवायरनमेंटल इन्फॉर्मेशन, अवेयरनेस, कैपेसिटी बिल्डिंग एंड लाइवलीहुड प्रोग्राम। इस कार्यक्रम के तहत नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के 130 शहरों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


प्रदूषण की स्थिति का आंकलन

इस अभियान का उद्देश्य लोगों को पटाखे न जलाने, दीयों और ऊर्जा-कुशल लाइट का उपयोग करने, सिंगल यूज प्लास्टिक से बचने और कचरे को अलग-अलग रखने के लिए जागरूक करना है। लेकिन सवाल यह है कि सरकार की अपीलों के बावजूद दिवाली के आसपास प्रदूषण की स्थिति में कितना बदलाव आया है।


दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI)

दिल्ली में, 2018 में दिवाली से एक दिन पहले AQI 338, दिवाली के दिन 281 और अगले दिन 390 था। 2019 में ये आंकड़े क्रमशः 287, 337 और 368 रहे। 2020 में AQI दिवाली के दिन 414 और अगले दिन 435 तक पहुंच गया। 2021 में यह क्रमशः 314, 382 और 462 था। 2022 में दिवाली से पहले AQI 259, दिवाली के दिन 312 और अगले दिन 302 रहा।


2023 और 2024 के AQI आंकड़े

2023 में दिवाली से एक दिन पहले AQI 220, दिवाली के दिन 218 और अगले दिन 358 रहा। 2024 में यह क्रमशः 304, 339 और 362 था। 2025 में AQI के आंकड़े 326, 345 और 351 रहे। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई वर्षों में दिवाली के बाद AQI में वृद्धि हुई है, हालांकि 2022 में गिरावट देखी गई।


पिछले साल की स्थिति

पिछले साल दिवाली के बाद जहरीली धुंध छा गई थी, जिससे हवा की गुणवत्ता और खराब हो गई। यह तब हुआ जब अदालत ने कम प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों के उपयोग का निर्देश दिया था, लेकिन लोगों ने इसका पालन नहीं किया।


AQI के स्तर और स्वास्थ्य पर प्रभाव

AQI के विभिन्न स्तरों को इस प्रकार समझा जा सकता है: 101 से 200: मध्यम, 201 से 300: खराब, 301 से 400: बहुत खराब, और 400 से ऊपर: गंभीर। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 24 घंटे में PM2.5 का औसत स्तर 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए, लेकिन दिल्ली के कुछ क्षेत्रों में यह स्तर 24 गुना अधिक था।


सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

पिछले साल दिवाली से एक सप्ताह पहले सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर प्रतिबंध में ढील दी थी। अदालत ने कुछ शर्तों के साथ 'ग्रीन पटाखे' जलाने की अनुमति दी, जो पारंपरिक पटाखों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत कम प्रदूषण फैलाते हैं। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ग्रीन पटाखे भी प्रदूषण का कारण बनते हैं।