धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा: छात्रों की चिंताओं का क्या होगा?
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका यह कदम छात्रों और प्रदर्शनकारियों के प्रति एक तरह से अहसान जताने के रूप में देखा जा रहा है। इस्तीफे में उन्होंने किसी भी प्रकार की जवाबदेही लेने से परहेज किया। प्रधानमंत्री को भेजी गई चिट्ठी सामान्य प्रारूप में थी, जिसमें उन्होंने 'युवा साथियों' के लिए दो पन्नों की चिट्ठी में अपने योगदान का जिक्र किया। उन्होंने यह भी बताया कि पेपर लीक की घटनाओं के बाद उन्होंने सुधार के लिए कितनी तत्परता दिखाई। प्रधान ने इस्तीफे का कारण बताया कि छात्रों और युवाओं के आंदोलन का दुरुपयोग हो सकता है।
नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस लिया था, जब किसान एक साल से आंदोलन कर रहे थे। उस समय सरकार ने इस मुद्दे पर कोई ध्यान नहीं दिया था, लेकिन चुनाव नजदीक आने पर प्रधानमंत्री ने कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया। उन्होंने यह नहीं माना कि कानूनों में कोई कमी थी, बल्कि कहा कि किसानों को गुमराह किया जा रहा था।
धर्मेंद्र प्रधान की चिट्ठी और प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में कोई खास अंतर नहीं है। दोनों ने ही छात्रों और किसानों को नासमझ बताया है। प्रधान ने छात्रों के आंदोलन का बेजा इस्तेमाल न होने के लिए इस्तीफा दिया है, लेकिन अब यह देखना होगा कि पेपर लीक की जिम्मेदारी किसकी है। शिक्षा मंत्री रहते हुए दो बार नीट यूजी का पेपर लीक हुआ, जिससे छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
