धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा: छात्रों के आंदोलन का असर
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा मांगने के लिए 6 जून से जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आंदोलन चलाया जा रहा था। NEET पेपर लीक मामले में प्रदर्शनकारियों का गुस्सा प्रधान के खिलाफ सबसे अधिक था। इस आंदोलन में सभी विवाद उनके इर्द-गिर्द घूम रहे थे। प्रदर्शनकारी स्पष्ट कर चुके थे कि यदि प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया, तो उनका विरोध देशभर में फैल जाएगा.
प्रधान के इस्तीफे का राजनीतिक प्रभाव
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कारण बीजेपी के अन्य नेताओं के खिलाफ भी आवाजें उठ रही हैं। पहले कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ ऐसा गुस्सा नहीं देखा गया, जैसा अब देखने को मिल रहा है। विभिन्न शहरों में पीएम मोदी के खिलाफ आक्रोश बढ़ रहा है और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
ऑनलाइन आंदोलन का विस्तार
मई से शुरू हुआ यह ऑनलाइन आंदोलन अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान NEET और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक, तकनीकी समस्याओं और परीक्षाओं के रद्द होने के कारण छात्रों के गुस्से का शिकार बने थे.
धर्मेंद्र प्रधान का बयान
धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी चिट्ठी में लिखा, 'मैं पिछले 40 वर्षों से शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा विश्वास है कि एक सशक्त शिक्षा प्रणाली ही एक मजबूत राष्ट्र की नींव होती है।' उन्होंने यह भी कहा कि वह देश के युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते हैं और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का अवसर मिलने के लिए आभार व्यक्त किया.
NEET परीक्षा में अनियमितता
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 3 मई 2026 को हुई NEET-UG परीक्षा में अनियमितताएं पाई गईं। भारत सरकार ने तुरंत इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपते हुए परीक्षा को रद्द किया और नई तिथि घोषित की। इसके साथ ही, अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया.
उपलब्धियों का जिक्र
धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा को सुचारू रूप से आयोजित करना था। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में भारत सरकार, राज्य सरकार और जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
इस्तीफे की वजह
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कुछ व्यक्तियों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे वह अत्यंत व्यथित हुए। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की असली ताकत है और वह उन्हें भ्रम में नहीं फंसने देंगे.
जंतर मंतर पर स्थिति
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जंतर मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, उसका राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ नहीं उठाएं। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और करियर बनाने पर ध्यान देना चाहिए, इसी सोच के साथ उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया.
