नई योजना: छोटे करदाताओं के लिए विदेशी संपत्तियों की घोषणा की सुविधा
आयकर विभाग ने शुरू की नई स्वैच्छिक योजना
आयकर विभाग ने शनिवार को एक नई योजना की घोषणा की है, जिसका नाम फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स-डिस्क्लोजर स्कीम (फास्ट-डीएस) है। इस योजना के तहत, छोटे करदाताओं को 31 दिसंबर 2026 तक अपनी विदेशी संपत्तियों की जानकारी देने का अवसर मिलेगा। इस प्रक्रिया में, करदाताओं को 30 प्रतिशत कर का भुगतान करना होगा, साथ ही एक अतिरिक्त राशि भी देनी होगी, जो कर के बराबर होगी।
योजना का उद्देश्य
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने बताया कि यह योजना 16 अगस्त से लागू होगी। इसके अंतर्गत, करदाता ऑनलाइन माध्यम से अपनी संपत्तियों या आय की जानकारी दे सकेंगे। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना की घोषणा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य योग्य करदाताओं को बिना किसी दंड या अभियोजन के विदेशी संपत्तियों को कर के दायरे में लाना है।
किसके लिए है यह योजना?
यह योजना उन करदाताओं के लिए है जिन्होंने अपनी योग्य विदेशी संपत्तियों या आय को घोषित नहीं किया है। इसमें छात्र, युवा पेशेवर, तकनीकी कर्मचारी और स्थानांतरित गैर-निवासी भारतीय शामिल हैं। करदाताओं को घोषित-अघोषित विदेशी संपत्ति या आय के मूल्य पर 30 प्रतिशत कर का भुगतान करना होगा, जिससे कुल कर 60 प्रतिशत हो जाएगा। संपत्तियों का मूल्यांकन 31 मार्च, 2026 के अनुसार किया जाएगा।
घोषणा के लिए श्रेणियां
- पहली श्रेणी: इसमें ऐसी अघोषित विदेशी संपत्ति या आय शामिल है, जिसका कुल मूल्य एक करोड़ रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए।
- दूसरी श्रेणी: इसमें वे संपत्तियां शामिल हैं, जिन्हें पहले कर के लिए प्रस्तुत किया गया था, लेकिन संबंधित कर-रिटर्न में रिपोर्ट नहीं की गई थीं। इनकी सीमा पांच करोड़ रुपये है, जिसमें एक लाख रुपये का शुल्क देय है।
टैक्स की गणना कैसे करें?
सीबीडीटी ने कहा है कि यह योजना योग्य करदाताओं को कुछ अघोषित विदेशी संपत्तियों को निर्दिष्ट कर या शुल्क का भुगतान करके घोषित करने में सक्षम बनाती है। उदाहरण के लिए, यदि एक अघोषित विदेशी बैंक खाते का मूल्यांकन 60 लाख रुपये है और अघोषित विदेशी आय 20 लाख रुपये है, तो कुल कर देय 48 लाख रुपये होगा।
मुकदमेबाजी से छूट
सीबीडीटी के अनुसार, जो करदाता वैध घोषणाएं करेंगे, उन्हें आगे के किसी भी कर या दंड से छूट मिलेगी। इसके अलावा, 2015 के काला धन अधिनियम के तहत अभियोजन या मुकदमेबाजी से भी उन्हें छूट प्राप्त होगी। घोषित संपत्तियों में निवेश की गई राशि को भी आयकर अधिनियम, 1961 या काला धन अधिनियम के तहत करदाता की कुल आय में शामिल नहीं किया जाएगा।
