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नई शिक्षा नीति के तहत NCERT किताबों में बदलाव: विवाद और बहस

नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत NCERT ने स्कूलों की किताबों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जो विवादों का कारण बने हैं। हाल ही में कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में 1975-77 के आपातकाल और अन्य विषयों को शामिल किया गया है, जिससे फिर से बहस छिड़ गई है। पहले भी मुगल इतिहास और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं पर किए गए बदलावों ने विवाद उत्पन्न किए हैं। जानें, इन बदलावों का इतिहास और उनके पीछे की वजहें।
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नई शिक्षा नीति का प्रभाव

नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कार्यान्वयन के बाद, NCERT ने स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। यह प्रक्रिया 2022 में कोविड-19 के दौरान पाठ्यक्रम को 'रैशनलाइज' करने से शुरू हुई, जिसका अर्थ है कि सिलेबस को संक्षिप्त और व्यवस्थित किया गया। इसके बाद, 2024 से राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के अंतर्गत नई किताबें लागू की जाने लगीं। इन परिवर्तनों में कई ऐसे विषय शामिल हैं, जिन पर राजनीतिक दलों, शिक्षाविदों और इतिहासकारों के बीच तीखी बहस हुई।


कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान किताब में नया विवाद

हाल ही में कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब को लेकर फिर से विवाद उत्पन्न हुआ है। इस किताब में 1975-77 के आपातकाल, भारतीय ज्ञान परंपरा, चुनाव आयोग और मनुस्मृति से संबंधित नए संदर्भ जोड़े गए हैं।


पिछले विवादों की श्रृंखला

यह पहली बार नहीं है जब NCERT की किताबों में बदलाव पर सवाल उठाए गए हैं। इससे पहले मुगल इतिहास, महात्मा गांधी की हत्या के बाद RSS पर लगे प्रतिबंध, गुजरात दंगों और लोकतंत्र से जुड़े अध्यायों में किए गए परिवर्तनों ने भी विवादों को जन्म दिया था।


बदलावों का इतिहास

बदलावों की प्रक्रिया 2021-22 में शुरू हुई, जब कोविड-19 के कारण पढ़ाई में आई रुकावटों को दूर करने के लिए NCERT ने सिलेबस को छोटा करने का निर्णय लिया। इसके तहत कक्षा 11 की राजनीति विज्ञान की किताब से संघवाद, धर्मनिरपेक्षता, नागरिकता और राष्ट्रवाद जैसे महत्वपूर्ण अध्याय हटा दिए गए या उन्हें संक्षिप्त किया गया। इसी तरह, कक्षा 10 की किताबों से 'लोकतंत्र और विविधता' और 'लोकतंत्र की चुनौतियां' जैसे अध्याय भी हटा दिए गए। इस निर्णय पर कई लोगों ने चिंता व्यक्त की कि इससे बच्चों की लोकतंत्र की समझ पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


2023 का बड़ा विवाद

2023 में सबसे बड़ा विवाद तब उत्पन्न हुआ जब 12वीं की इतिहास की किताब से मुगल साम्राज्य से संबंधित कई अध्यायों के अंश हटा दिए गए। इसके अलावा, महात्मा गांधी की हत्या के बाद RSS पर लगे प्रतिबंध का उल्लेख और गुजरात दंगों से जुड़े कुछ अंश भी किताब से निकाल दिए गए। इस पर काफी विवाद हुआ, जिसमें आलोचकों ने कहा कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ की जा रही है, जबकि NCERT ने इसे रैशनलाइजेशन की प्रक्रिया का हिस्सा बताया।


नई पाठ्यचर्या का आगाज

2024 और 2025 में नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के तहत नई NCERT किताबें जारी की गईं। इन किताबों में भारतीय ज्ञान परंपरा, स्थानीय इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और अनुभव से सीखने पर जोर दिया गया। वहीं, मध्यकालीन इतिहास, मंदिरों के विध्वंस और भारतीय सभ्यता को नए दृष्टिकोण से पेश करने को लेकर शिक्षा विशेषज्ञों और इतिहासकारों के बीच नई बहस शुरू हो गई।


2026 में नया विवाद

2026 में आई नई सामाजिक विज्ञान की किताबों में 1975 की इमरजेंसी पर एक अलग अध्याय जोड़ा गया है। इसमें इमरजेंसी को भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी और कठिन परीक्षा बताया गया है। इसके अलावा, किताबों में मनुस्मृति के एक श्लोक का उल्लेख, चुनाव आयोग की भूमिका और न्यायपालिका से संबंधित नए विषय भी शामिल किए गए हैं।