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नवनेथम पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार, मानवाधिकारों के लिए संघर्ष की कहानी

दक्षिण अफ्रीका की न्यायविद नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की घोषणा की गई है। उन्हें मानवाधिकारों और शांति के लिए उनके प्रयासों के लिए यह सम्मान दिया गया है। पिल्लई का जीवन रंगभेद और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की कहानी है, जो भारतीय मूल से जुड़ी है। जानें उनके अद्वितीय सफर और उपलब्धियों के बारे में, जो उन्हें वैश्विक न्याय व्यवस्था के शीर्ष पर ले गईं।
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नवनेथम पिल्लई का नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मान

ओस्लो: दक्षिण अफ्रीका की प्रसिद्ध न्यायविद और मानवाधिकार विशेषज्ञ नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने इस बात की आधिकारिक जानकारी शुक्रवार को दी। उन्हें वैश्विक स्तर पर शांति, मानव गरिमा और अंतरराष्ट्रीय कानून को सुदृढ़ करने के लिए उनके निरंतर प्रयासों के लिए यह सम्मान दिया गया है। भारतीय मूल की नवी पिल्लई का जीवन रंगभेद और अन्याय के खिलाफ एक ऐतिहासिक संघर्ष की कहानी है।


भारत से गहरा संबंध: दादा-दादी का गिरमिटिया मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका जाना

नवी पिल्लई की जड़ें भारत से जुड़ी हैं। उनके पिता नारायणसामी नायडू और माता संथामा नायडू का संबंध तमिलनाडु से है। 1890 के दशक में उनके दादा-दादी को गन्ने के खेतों में काम करने के लिए भारत से दक्षिण अफ्रीका लाया गया था। पिल्लई के पिता ने अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए कई कठिन काम किए। 23 सितंबर 1941 को डरबन में जन्मी पिल्लई ने अभाव और नस्लीय भेदभाव के बीच अपनी शिक्षा पूरी की।


रंगभेद के समय की पहली अश्वेत महिला वकील

जब दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद का दौर चल रहा था, तब पिल्लई ने कानून को अपने अधिकार के रूप में अपनाया। 1967 में वकालत शुरू करने के बाद, वह नटाल प्रांत में स्वतंत्र कानूनी प्रैक्टिस शुरू करने वाली पहली अश्वेत महिला वकील बनीं। इस दौरान उन्होंने रंगभेद विरोधी आंदोलनकारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उनका मानना था कि सलाखों के पीछे भी इंसान की गरिमा और अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।


रवांडा नरसंहार में ऐतिहासिक निर्णय

नवी पिल्लई का कानूनी करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ 1994 के रवांडा नरसंहार के मामलों की सुनवाई थी। 1995 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण (ICTR) में जज नियुक्त किया गया और 1999 से 2003 तक वह इसकी अध्यक्ष रहीं। जीन-पॉल अकायेसु के मामले में उनकी पीठ ने पहली बार यह स्थापित किया कि युद्ध के दौरान महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा नरसंहार का एक रूप है। इस निर्णय ने अंतरराष्ट्रीय कानून की दिशा को बदल दिया।


संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में निडर आवाज

2003 में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की न्यायाधीश बनने के बाद, पिल्लई को 2008 में संयुक्त राष्ट्र का मानवाधिकार उच्चायुक्त नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ बेबाकी से आवाज उठाई। इसके अलावा, वह महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था 'इक्वैलिटी नाउ' की सह-संस्थापक भी हैं।


नोबेल पुरस्कार समारोह की तारीख

नोबेल शांति पुरस्कार के तहत 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर की पुरस्कार राशि दी जाती है। यह सम्मान 10 दिसंबर को ओस्लो में आयोजित समारोह में नवनेथम पिल्लई को औपचारिक रूप से प्रदान किया जाएगा। उनका यह सम्मान इस बात का प्रतीक है कि सच्ची शांति का आधार केवल युद्धविराम नहीं, बल्कि पीड़ितों को न्याय और अपराधों के लिए जिम्मेदारी तय करना है।