निठारी कांड: सुरेंद्र कोली की आत्महत्या से फिर गरमाई चर्चा
सुरेंद्र कोली की आत्महत्या और निठारी कांड की पुनरावृत्ति
नई दिल्ली: सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में कथित आत्महत्या ने लगभग दो दशक पुराने निठारी कांड को फिर से चर्चा में ला दिया है। कोली को नोएडा की डी-5 कोठी में घरेलू सहायक के रूप में जाना जाता था, जहां के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर भी इस मामले में आरोपी थे। कोली की मृत्यु के बाद, लोगों की जिज्ञासा इस बात पर है कि पंढेर अब कहां हैं और उनकी जिंदगी कैसे चल रही है।
कोली और पंढेर को निठारी से जुड़े कई मामलों में पहले दोषी ठहराया गया था, लेकिन अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। इसके बाद पंढेर जेल से बाहर आ गए, जबकि कोली से संबंधित एक मामला बाद में भी कानूनी प्रक्रिया में रहा। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में भी कोली की दोषसिद्धि को समाप्त कर दिया।
पंढेर की रिहाई और चंडीगढ़ में नई जिंदगी
मोनिंदर सिंह पंढेर को 20 अक्टूबर 2023 को ग्रेटर नोएडा की लुक्सर जेल से रिहा किया गया। इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद, उन्होंने चंडीगढ़ में अपने परिवार के साथ रहने का निर्णय लिया। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद, उनका जीवन अब परिवार के बीच लौट आया है।
रिपोर्टों के अनुसार, पंढेर का परिवार चंडीगढ़ में है और वह बदायूं में उर्वरक कारोबार से जुड़ा रहा है। जेल जाने से पहले भी यह कारोबार उनके परिवार से संबंधित था। हालाँकि, निठारी मामले में उनकी कानूनी स्थिति 2023 में हाई कोर्ट के फैसले के बाद बदल गई, जिससे उन्हें बरी कर दिया गया।
कोली की संदिग्ध मौत की परिस्थितियाँ
सुरेंद्र कोली हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र में रह रहे थे। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने सप्त सरोवर रोड पर एक चाय की दुकान खोली थी, जो कि शुरू होने के तीन दिन बाद ही वह फंदे से लटके पाए गए। मौके से उनका आधार कार्ड भी मिला, जिससे उनकी पहचान की पुष्टि हुई।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, लेकिन घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस कोली की हालिया गतिविधियों और हरिद्वार पहुंचने की परिस्थितियों की जांच कर रही है। अधिकारियों ने उनके भाई से भी संपर्क किया है। मौत की परिस्थितियों की जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
निठारी कांड की पुनरावृत्ति
निठारी कांड दिसंबर 2006 में तब सामने आया था जब नोएडा के सेक्टर-31 में एक मकान के पास मानव अवशेष मिले थे। यह मकान मोनिंदर सिंह पंढेर का था, जहां कोली घरेलू काम करता था। इसके बाद दोनों को कई मामलों में आरोपी बनाया गया और वर्षों तक अदालतों में मुकदमे चले। 2023 में हाई कोर्ट ने पंढेर को सबूतों के अभाव में बरी किया।
कोली का कानूनी सफर भी लंबा रहा। निचली अदालतों से मिली सजा के बाद उनके मामले उच्च अदालतों तक पहुंचे। 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम लंबित निठारी मामले में उनकी दोषसिद्धि भी रद्द कर दी। कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि समान साक्ष्य के आधार पर जुड़े 12 मामलों में वह पहले ही बरी हो चुके थे। अब उनकी मृत्यु ने इस पुराने मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है।
