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नितिन गडकरी का बड़ा बयान: ई20 पेट्रोल के खिलाफ विरोध एक प्रायोजित अभियान था

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में ई20 पेट्रोल के खिलाफ उठे विवाद को एक प्रायोजित अभियान करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस विरोध का कोई ठोस आधार नहीं था और अब यह समाप्त हो चुका है। साथ ही, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की सीमा को बढ़ाने की योजना से इनकार किया है। जानें इस मुद्दे के पीछे की सच्चाई और सरकार की रणनीतियों के बारे में।
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ई20 पेट्रोल पर नितिन गडकरी का बयान

नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि ई20 पेट्रोल के खिलाफ जो विरोध हुआ, वह दरअसल एक प्रायोजित अभियान था। यह बयान उस समय आया जब सरकार ने 'केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989' में संशोधन की अधिसूचना जारी की। इस संशोधन के तहत 'फ्लेक्स-फ्यूल' वाहनों को अनुमति दी गई है, जो ई100 (लगभग शुद्ध इथेनॉल) पर चल सकते हैं।

गडकरी ने एक कार्यक्रम में कहा कि भारत को जीवाश्म ईंधन के आयात को कम करके अपनी विदेशी मुद्रा की बचत करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि 'तीन महीने पहले, ई20 ईंधन के खिलाफ काफी हंगामा हुआ था, लेकिन अब वह विरोध समाप्त हो चुका है। यह सब एक प्रायोजित अभियान था।' उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में उन्होंने 700-800 परियोजनाओं की समीक्षा की है, ताकि राजमार्गों की गुणवत्ता में कोई कमी न आए।


हरदीप सिंह पुरी का बयान

हरदीप सिंह पुरी ने क्या कहा?

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार की पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की मौजूदा 20 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। दक्षिण गोवा में '29वें एनर्जी टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन मीट' के उद्घाटन के दौरान, उन्होंने कहा कि बायोफ्यूल के बारे में गलत जानकारी फैलाई जा रही है। पुरी ने कहा, 'ई20 के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारी एक सोची-समझी कहानी है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के लिए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है।


ई20 पेट्रोल विवाद का कारण

ई20 पेट्रोल को लेकर विवाद क्यों हुआ?

ई20 पेट्रोल के खिलाफ विवाद तब बढ़ा जब वाहन चालकों ने शिकायत की कि इसके उपयोग से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है और पुराने वाहनों के इंजन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ई20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। सरकार ने इस नीति को प्रदूषण कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए आवश्यक बताया है।

विवाद का एक बड़ा कारण यह रहा कि कई उपभोक्ताओं को पेट्रोल के कम एथेनॉल वाले विकल्प उपलब्ध नहीं थे। कुछ वाहन मालिकों ने माइलेज में गिरावट का दावा किया। हालांकि, सरकार का कहना है कि पुराने वाहनों में ईंधन दक्षता 3 से 5 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकती है।