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नीट पीजी में रैंक आधारित प्रणाली का प्रस्ताव, पर्सेंटाइल व्यवस्था खत्म करने की तैयारी

नीट पीजी में दाखिले की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना है। विशेषज्ञ समिति ने मौजूदा पर्सेंटाइल आधारित प्रणाली को समाप्त कर रैंक आधारित मेरिट प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चिंता जताई है, जबकि समिति ने खाली सीटों को भरने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। जानें इस प्रस्ताव के पीछे की वजहें और भविष्य की काउंसलिंग प्रक्रिया में क्या बदलाव होंगे।
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नीट पीजी में संभावित बदलाव

नई दिल्ली। मेडिकल स्नातकोत्तर (PG) सीटों के लिए दाखिले की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण परिवर्तन संभव है। नीट पीजी प्रवेश प्रणाली की समीक्षा के लिए गठित 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने मौजूदा पर्सेंटाइल आधारित पात्रता मानदंड को समाप्त कर रैंक आधारित मेरिट प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया है। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की गई है। समिति ने बताया कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने नीट पीजी और सुपर स्पेशियलिटी प्रवेश परीक्षा (NEET SS) के लिए इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।


पर्सेंटाइल में कमी का मामला

यह मामला नीट पीजी 2025 के लिए निर्धारित कटऑफ पर्सेंटाइल में भारी कमी के बाद सामने आया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने खाली पीजी मेडिकल सीटों को भरने के लिए पात्रता अंक में बड़ी कटौती की थी। सामान्य वर्ग का क्वालिफाइंग स्कोर 276 से घटाकर 103 कर दिया गया था, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए यह स्कोर 235 से घटाकर -40 कर दिया गया था।


सुप्रीम कोर्ट की चिंताएं

इस निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए थे। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने पात्रता पर्सेंटाइल में इतनी बड़ी कमी पर चिंता व्यक्त की थी। पीठ ने कहा कि इस तरह की कटौती से मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। अदालत ने केंद्र सरकार को मौजूदा नीट दाखिला व्यवस्था का व्यापक ऑडिट करने का निर्देश दिया था।


समिति की चिंताएं और सुझाव

विशेषज्ञ समिति ने कहा कि खाली सीटों की संख्या को देखते हुए पात्रता पर्सेंटाइल में कमी की गई है, लेकिन पीजी मेडिकल शिक्षा के न्यूनतम मानकों को बनाए रखना आवश्यक है। समिति ने कई उपाय सुझाए हैं, जैसे कि गैर-क्लिनिकल पाठ्यक्रमों की फीस कम करने का सुझाव दिया गया है ताकि अधिक उम्मीदवार इन विषयों में दाखिला ले सकें।


काउंसलिंग प्रक्रिया में सुधार

समिति ने काउंसलिंग के अतिरिक्त चरण आयोजित करने का सुझाव दिया है, ताकि सीटें खाली न रहें। हालांकि, समिति ने चेतावनी दी है कि अतिरिक्त चरणों से काउंसलिंग प्रक्रिया में समय बढ़ सकता है।


डेंटल और नर्सिंग के लिए सुझाव

समिति ने डेंटल और नर्सिंग स्नातकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने का सुझाव दिया है। इसके अलावा, लगातार खाली रहने वाली सीटों को बंद करने और इन पाठ्यक्रमों की फीस कम करने पर विचार करने का भी सुझाव दिया गया है।


काउंसलिंग प्रक्रिया में बदलाव

मेडिकल काउंसलिंग समिति ने 2026-27 की काउंसलिंग प्रक्रिया में कई बदलाव किए हैं, जिनका उद्देश्य देरी और उम्मीदवारों की परेशानी को कम करना है। नए नियमों के तहत उम्मीदवारों को उनकी पसंद के अनुसार फ्रीज और फ्लोट श्रेणियों में बांटा गया है।


भविष्य की काउंसलिंग प्रक्रिया

विशेषज्ञ समिति ने भविष्य की काउंसलिंग प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं, जिसमें सत्यापित सीटों का विवरण समय पर उपलब्ध कराना शामिल है।


याचिकाकर्ता के वकील की चिंताएं

सुप्रीम कोर्ट में समिति की रिपोर्ट पेश होने के बाद याचिकाकर्ताओं के वकील ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पात्रता कटऑफ अंकों में भारी कमी के फैसले को सही ठहराने के बजाय समिति ने अंक निर्धारण की व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव दिया है।