नीट पेपर लीक पर छात्रों का विरोध, सरकार ने उठाए सख्त कदम
सरकार का बड़ा कदम
नीट परीक्षा के पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के बढ़ते विरोध के बीच, केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। पेपर लीक के बाद से एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे थे, और छात्रों के आक्रोश को देखते हुए सरकार ने एनटीए में सुधार की प्रक्रिया शुरू की है। यह संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में और भी सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
एनटीए में सुधार की प्रक्रिया
केंद्र सरकार एनटीए के पुनर्गठन और उसके भीतर जवाबदेही बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। उल्लेखनीय है कि 2024 में भी एनटीए पेपर लीक के मामले में चर्चा में रही थी। यह एजेंसी नीट-यूजी, जेईई मेन और सीयूईटी जैसी 15 से 20 परीक्षाओं का आयोजन करती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों की बर्खास्तगी के अलावा, कुछ के खिलाफ आपराधिक और कानूनी कार्रवाई की योजना भी बनाई जा रही है।
एनटीए के पदों की स्थिति
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, एनटीए में कुल 39 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 24 स्थायी पद भरे गए हैं। एजेंसी का कार्य 73 संविदा कर्मचारियों और 124 आउटसोर्स कर्मियों के माध्यम से चलाया जा रहा है। एनटीए की आय 2019-20 में 504.16 करोड़ रुपये थी, जो 2023-24 में बढ़कर 1,116.84 करोड़ रुपये हो गई। हालांकि, इस दौरान एजेंसी ने 1,040.96 करोड़ रुपये का व्यय किया।
छात्रों का गुस्सा और सीजेपी की मांग
पेपर लीक के खिलाफ देशभर के छात्रों में भारी आक्रोश है। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ प्रदर्शन अब कई राज्यों में फैल चुका है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है।
शुक्रवार को सीजेपी नेताओं और केंद्र सरकार के बीच कई घंटों तक बैठक हुई। सरकार ने दो मांगों पर सहमति जताई, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। सीजेपी नेताओं के अनुसार, केंद्र ने 24 घंटे का समय मांगा है।
