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नीट पेपर लीक पर प्रदर्शन: रुचिका सिंह के खिलाफ एफआईआर पर विवाद

नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को जन्म दिया है। सौरव दास ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अभद्र भाषा का उपयोग आपराधिक मुकदमा चलाने का आधार नहीं हो सकता। इस मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि रुचिका की टिप्पणी प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ है। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है, जिसमें एक पक्ष कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला मानता है।
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नई दिल्ली में विवादास्पद एफआईआर


नई दिल्ली: जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर अब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है। इस मामले में सौरव दास ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल अभद्र भाषा का उपयोग किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का आधार नहीं हो सकता।


सौरव दास की प्रतिक्रिया

सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि 25 वर्षीय युवती के खिलाफ आपराधिक कानूनों का उपयोग पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को गंभीर आपराधिक मामलों की जांच में अपनी ऊर्जा लगानी चाहिए, न कि एक युवती के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई में। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं के कथित उत्पीड़न पर चिंता व्यक्त की।



मामले का विवरण

कब का है ये मामला? पूरा मामला 23 जुलाई 2026 का है, जब दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्र और युवा प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान रुचिका सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करती हुई दिखाई दी। वीडियो के सामने आने के बाद इस पर कार्रवाई की मांग उठी।


शिकायतकर्ता के आरोप

शिकायतकर्ता ने क्या लगाया आरोप? शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल की गई कथित भाषा प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ है। शिकायत में यह भी कहा गया कि इस तरह की टिप्पणी से समाज में दुर्भावना फैल सकती है और सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका हो सकती है।


पुलिस कार्रवाई

क्या लिया गया एक्शन? शिकायत के आधार पर 29 जुलाई 2026 को गौतमबुद्ध नगर के एक्सप्रेसवे थाना में जीरो एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। चूंकि घटना दिल्ली के संसद मार्ग थाना क्षेत्र में हुई थी, इसलिए कानूनी प्रक्रिया के तहत मामला आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस को भेज दिया गया। अब संसद मार्ग थाना उपलब्ध वीडियो, शिकायत और अन्य साक्ष्यों की जांच कर आगे की कार्रवाई करेगा।


लोगों की प्रतिक्रिया

कैसी है लोगों की प्रतिक्रिया? इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई है। एक पक्ष का कहना है कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल गंभीर विषय है और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं दूसरा पक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आपराधिक कानूनों के संतुलित उपयोग का मुद्दा बता रहा है।