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नीति आयोग की बैठक: शांति अधिनियम 2025 के कार्यान्वयन पर चर्चा

नीति आयोग ने 'शांति अधिनियम 2025' के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में सरकार, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के विशेषज्ञों ने कानून के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। बैठक में विधायी ढांचे, वित्तीय व्यवस्था और विनिर्माण क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया गया। शांति अधिनियम का उद्देश्य भारत को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करना है।
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शांति अधिनियम 2025 पर महत्वपूर्ण बैठक

नई दिल्ली: नीति आयोग ने 'शांति अधिनियम 2025' के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक महत्वपूर्ण परामर्श बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में सरकार, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के विशेषज्ञों ने कानून के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए, जो इसके कार्यान्वयन ढांचे को मजबूत बनाने में सहायक होंगे।


नीति आयोग के अनुसार, इस बैठक में नीति-निर्माताओं, शोध संस्थानों और उद्योग से जुड़े प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य शांति अधिनियम 2025 के संचालन को प्रभावी और व्यावहारिक बनाना था।


बैठक में चर्चा को कानून के सफल कार्यान्वयन के लिए आवश्यक तीन प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित किया गया।


पहला स्तंभ था विधायी और नियामकीय ढांचा। इस सत्र में शांति अधिनियम 2025 के तहत तैयार किए गए ड्राफ्ट नियमों, विनियमों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति से जुड़े प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।


विशेषज्ञों ने कानून के तहत वैधानिक अनुपालन की प्रक्रिया पर विचार किया। इसके साथ ही यह भी चर्चा की गई कि कैसे विदेशी निवेश को आकर्षित किया जाए, जबकि देश के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।


दूसरा स्तंभ था वित्त, बीमा और जनविश्वास। इस सत्र में कानून के सफल कार्यान्वयन के लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्था और जोखिम प्रबंधन पर चर्चा की गई।


इसमें दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए उपयुक्त बीमा व्यवस्था तैयार करने और आम जनता के बीच जागरूकता, विश्वास और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीतियों पर विचार किया गया।


तीसरा स्तंभ था विनिर्माण, संचालन और क्षमता निर्माण, जिसमें कानून के लागू होने के बाद की संचालन प्रक्रिया पर चर्चा की गई। इस सत्र में घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, परियोजनाओं की संचालन संबंधी तैयारियों को मजबूत करने और कुशल मानव संसाधन विकसित करने पर जोर दिया गया।


हितधारकों ने सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और लचीला बनाने तथा उद्योग के विस्तार के लिए विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम तैयार करने पर भी सुझाव दिए।


यह बैठक नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर की अध्यक्षता में आयोजित की गई।


शांति अधिनियम 2025 का उद्देश्य भारत को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और विकसित भारत 2047 के तहत निर्धारित स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करना है।


इस कानून के माध्यम से निजी क्षेत्र और संयुक्त उपक्रमों की जिम्मेदार भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे संसाधनों की कमी दूर करने, परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। साथ ही, इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।