नेपाल ने भारतीय सीमा पर चीनी थर्मल कैमरे लगाए
नेपाल का नया सुरक्षा कदम
नेपाल ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से सटी भारत-नेपाल सीमा पर चीनी निर्मित उच्च तकनीक वाले थर्मल और सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए हैं। इन कैमरों के माध्यम से नेपाल भारतीय क्षेत्र में 10 किलोमीटर अंदर तक की गतिविधियों पर नजर रख सकेगा। यह कदम भारत-नेपाल सीमा विवाद और चीन के बढ़ते तकनीकी प्रभाव को दर्शाता है।
सीमा की सुरक्षा व्यवस्था
यह कैमरे दिन और रात दोनों समय में स्पष्ट दृष्टि प्रदान करते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीकी निगरानी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दा बन सकती है।
भारत-नेपाल की लंबी सीमा
भारत और नेपाल के बीच लगभग 275 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। इस सीमा की सुरक्षा भारत की ओर से सशस्त्र सीमा बल और नेपाल की ओर से आर्म्ड पुलिस फोर्स द्वारा की जाती है। पिछले कुछ वर्षों में नेपाल ने अपनी सीमा सुरक्षा और निगरानी को मजबूत किया है।
कालापानी विवाद के बाद की गतिविधियाँ
2020 में कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा के विवाद के बाद नेपाल ने सीमा क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को बढ़ा दिया था। नेपाल ने कालापानी के निकट एपीएफ का बटालियन मुख्यालय स्थापित किया और कई स्थानों पर नई बॉर्डर आउट पोस्ट बनाई।
चीनी इंटरनेट नेटवर्क का उपयोग
नेपाल द्वारा लगाए जा रहे नाइट विजन थर्मल कैमरे चीन में निर्मित हैं और इनका संचालन चीनी इंटरनेट नेटवर्क के माध्यम से किया जाएगा। इन कैमरों की क्षमता दिन और रात दोनों समय लंबी दूरी तक गतिविधियों की निगरानी करने की है।
तकनीकी सहयोग का इतिहास
नेपाल ने अपनी सीमा चौकियों को आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए 2016 में चीन के साथ एक समझौता किया था। इसके बाद विभिन्न स्थानों पर कैमरे लगाने के लिए सर्वेक्षण किया गया।
उत्तराखंड की सीमा से जुड़े जिले
उत्तराखंड में भारत और नेपाल के बीच 275 किलोमीटर लंबी सीमा पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधमसिंह नगर जिलों से होकर गुजरती है। नेपाल की ओर दाचुर्ला, बैतड़ी, डडेलधुरा और कंचनपुर जिले इससे जुड़े हैं।
