नेपाल में बाढ़ से तबाही: 275 भारतीय नागरिक लापता, राहत कार्य जारी
नेपाल में बाढ़ और हिमस्खलन से भारी नुकसान
26 अगस्त को नेपाल में आई भीषण बाढ़ और हिम-पत्थर के हिमस्खलन ने व्यापक तबाही मचाई है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, 275 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं। भारत ने नेपाल के राहत और बचाव कार्य में सहयोग जारी रखने का आश्वासन दिया है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने का वादा किया है।
166 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को जानकारी दी कि नेपाल में फंसे 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारत, नेपाली सरकार और उसके विदेश मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि बचाए गए भारतीय नागरिकों की सूची नियमित रूप से साझा की जा रही है। चीन से नेपाल की ओर अब तक 1,907 भारतीय नागरिक सुरक्षित पहुंच चुके हैं।
राहत सामग्री और विशेषज्ञों की मदद
नेपाल के राहत कार्य को मजबूत करने के लिए भारत ने अब तक सात विमानों से लगभग 95 टन राहत सामग्री भेजी है। गुरुवार को दो भारतीय विमानों ने 21 टन राहत सामग्री काठमांडू पहुंचाई। इसके अलावा, 54 भारतीय विशेषज्ञ और कर्मियों को भी नेपाल भेजा गया है, जिनमें 30 सुरंग बचाव विशेषज्ञ, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और एक पांच सदस्यीय मेडिकल टीम शामिल है।
नेपाल में मृतकों की संख्या 1,295 तक पहुंची
नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 1,295 हो गई। अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों से 1,293 शव बरामद किए गए हैं और काठमांडू के दो अस्पतालों में दो और लोगों की मौत के बाद यह आंकड़ा बढ़ा। यह आपदा 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के बाद शुरू हुई थी।
सुरंग से दो मजदूरों का जीवित मिलना
बचाव कार्य के दौरान त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग से दो मजदूरों को नौ दिन बाद जीवित निकाला गया। उनकी पहचान 45 वर्षीय मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महार्जन और 30 वर्षीय फोरमैन संजय साह के रूप में हुई है। महार्जन को नेपाल आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि संजय साह का इलाज नुवाकोट के त्रिशूली अस्पताल में चल रहा है।
