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नेपाल में बाढ़ से बढ़ता मौत का आंकड़ा, लापता लोगों की संख्या 3925

नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें मरने वालों की संख्या 955 तक पहुंच गई है। 3925 लोग अब भी लापता हैं। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, बाढ़ के कारण मलबे में दबे लोगों के बचने की संभावना कम होती जा रही है। चीन पर आरोप है कि उसने समय पर चेतावनी नहीं दी। जानें इस संकट के बारे में और क्या जानकारी सामने आई है।
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नेपाल में बाढ़ का कहर


नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, मलबे में दबे और सुरंगों में फंसे लोगों के बचने की संभावना घटती जा रही है। सोमवार, 31 अगस्त की शाम तक के आंकड़ों के अनुसार, नेपाल और तिब्बत में कुल मृतकों की संख्या 955 तक पहुंच गई है। इनमें से 939 लोग नेपाल में और 16 लोग तिब्बत में मारे गए हैं। उत्तर प्रदेश में गंडक नदी से 17 शव भी बरामद किए गए हैं।


नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, अब 3,925 लोग लापता हैं। पहले यह संख्या 4,247 बताई गई थी। चीन पर आरोप लग रहे हैं कि उसने समय पर सूचना नहीं दी। हालांकि, चीनी विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि उसके वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल सेंटर ने बाढ़ से 12 दिन पहले नेपाल को भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक बाढ़ की चेतावनी भेजी थी।


यह ध्यान देने योग्य है कि 27 मई को काठमांडू में दोनों देशों के बीच मौसम और ग्लेशियर से जुड़े खतरों पर एक बैठक हुई थी। नेपाल ने ग्लेशियरों में हलचल और संभावित खतरों की जानकारी पहले देने की मांग की थी। नेपाल का आरोप है कि चीन भारी बारिश का पूर्वानुमान तो देता है, लेकिन हिमस्खलन, पानी के स्तर, भूस्खलन और अन्य बड़े प्राकृतिक खतरों की जानकारी साझा नहीं करता। बताया जा रहा है कि 26 अगस्त को आई बाढ़ की सूचना चीन को पहले मिली थी। यदि चीन ने समय पर जानकारी साझा की होती, तो सैकड़ों लोगों की जान बचाई जा सकती थी।