पंचनद शोध संस्थान के वार्षिक व्याख्यान में नागरिक दायित्व और सांस्कृतिक मूल्यों पर चर्चा
कार्यक्रम का आयोजन
- अधिकारों के साथ कर्तव्यों का बोध भी जरूरी : नायब सिंह सैनी
चंडीगढ़ - पंचनद शोध संस्थान द्वारा आयोजित 33वें वार्षिक व्याख्यान में ‘हम भारत के लोग : हमारे दायित्व’ विषय पर विमर्श किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, सेक्टर-26 में हुआ। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस अवसर पर कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र के लिए नागरिकों को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी पालन करना आवश्यक है। मुख्य वक्ता डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने सूचना और ज्ञान के बीच की बढ़ती खाई और बौद्धिक वर्ग की सामाजिक जिम्मेदारी पर अपने विचार साझा किए।
भारत की विविधता और लोकतंत्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है। लोकतंत्र में मतभेद और असहमति स्वाभाविक हैं, लेकिन इन्हें देशहित और राष्ट्रीय एकता के खिलाफ नहीं होना चाहिए। उन्होंने महिलाओं के सम्मान, संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आदर, जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ज्ञान और सूचना की चुनौती
डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि तकनीक और सूचना की प्रचुरता के इस युग में वास्तविक ज्ञान और सूचना के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा है। तकनीक ने अवसरों का विस्तार किया है, लेकिन इसके साथ ही सामाजिक और बौद्धिक चुनौतियाँ भी उत्पन्न की हैं। बौद्धिक वर्ग की जिम्मेदारी है कि वह समाज को सही दिशा दिखाए।
संस्थान की यात्रा
पंचनद शोध संस्थान के अध्यक्ष प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने संस्थान की 42 वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि पंचनद अब ‘सप्त सिंधु’ के व्यापक स्वरूप में कार्य कर रहा है। इसके माध्यम से 20 हजार से अधिक लोग संवाद और विमर्श से जुड़ चुके हैं।
प्रकाशनों का विमोचन
कार्यक्रम में पंचनद के सात प्रकाशनों का विमोचन किया गया, जिनमें ‘पंचनद शोध पत्रिका-2026 : हम भारत के लोग’, ‘वैश्विक संदर्भ में भारतीय विमर्श’, ‘बंगाल में हिंदू नरसंहार 1946’, ‘चुनावों में प्रवासी मतदाता’, ‘जल प्रबंधन : चुनौतियां व समाधान’, ‘लोक विमर्श : प्रक्रिया व सिद्धांत’ और ‘संस्कृत साहित्य में सूक्ति मनोविज्ञान’ शामिल हैं।
विद्वानों की भागीदारी
आयोजक मनदीप कुमार अग्रवाल के अनुसार, इस कार्यक्रम में उत्तर भारत के 450 से अधिक विद्वानों और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। विमर्श में राष्ट्रीय एकता, नागरिक दायित्व, सांस्कृतिक जुड़ाव और सामाजिक समरसता को सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक बताया गया।
