पंजाब में अनाज भंडारण की समस्या का समाधान: सरकार ने तैयार किया प्रभावी योजना
भंडारण की समस्या का समाधान
मासिक 12 लाख मीट्रिक टन अनाज की लिफ्टिंग पर जोर, मंत्री समूह द्वारा खरीफ सीजन 2026-27 एवं रबी सीजन 2027-28 की तैयारियों की समीक्षा
चंडीगढ़ : पंजाब को अन्न का कटोरा माना जाता है, क्योंकि यहां की मिट्टी अत्यंत उपजाऊ है और धान तथा गेहूं की भरपूर पैदावार होती है। हालांकि, हर साल फसल खरीद के समय भंडारण की समस्या उत्पन्न होती है। अनाज उत्पादन के अनुसार भंडारण की कमी के कारण फसल खरीद और उठान में बाधा आती है, जिससे किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इस वर्ष ऐसी समस्याओं से बचने के लिए राज्य सरकार ने विशेष तैयारियां शुरू की हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक्क और जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल के मंत्री समूह ने सेक्टर-39 स्थित अनाज भवन में आगामी खरीफ और रबी सीजन की व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक की।
बैठक में लिए गए निर्णय
बैठक में मंत्रियों को बताया गया कि जनवरी से जुलाई के बीच राज्य से 75.67 लाख मीट्रिक टन अनाज की लिफ्टिंग की गई है, जिसमें 37.13 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 38.54 लाख मीट्रिक टन धान शामिल हैं। मंत्री समूह को यह भी जानकारी दी गई कि राज्य में कुल 181 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता उपलब्ध है, जबकि खुली भंडारण क्षमता 68 लाख मीट्रिक टन है।
केंद्र सरकार से उठाए जा रहे मुद्दे
जीओएम ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा अनाज की तीव्र लिफ्टिंग का मुद्दा केंद्र सरकार के समक्ष लगातार उठाया जा रहा है। पंजाब ने हर महीने कम से कम 12 लाख मीट्रिक टन गेहूं और धान की लिफ्टिंग की मांग की है, जबकि वर्तमान में यह दर केवल 5 लाख मीट्रिक टन प्रति माह है। इसलिए मंत्री समूह ने केंद्रीय खाद्य मंत्री से मिलने का निर्णय लिया है ताकि अनाज उठाव और अन्य मुद्दों पर चर्चा की जा सके।
केंद्रीय पूल के लिए धान का लक्ष्य
बैठक में यह भी बताया गया कि आगामी धान खरीद सीजन के लिए केंद्रीय पूल हेतु 180 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा गया है। धान की खरीद 2,462 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी।
