पंजाब में नशा तस्करी के नए रुझान: फार्मास्यूटिकल ड्रग्स की बढ़ती समस्या
ड्रोन डिटेक्शन और नशा तस्करी पर सख्त कार्रवाई
— ड्रोन डिटेक्शन प्लेटफॉर्म के रूप में 03 नई ‘ड्रोन सेंस डी200 प्रो’ यूनिटें तैनात
— पंजाब में हेरोइन की उपलब्धता में भारी गिरावट
— पंजाब में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल के तरीके में बदलाव: फार्मास्यूटिकल ड्रग्स की ओर बढ़ा रुझान
— पंजाब में तस्करी के जरिए आने वाली फार्मास्यूटिकल ड्रग्स में से 80 प्रतिशत से अधिक गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से आती हैं
— निर्माण इकाइयों के संबंध में बेहतर नियम बनाने, बिक्री पर नजर रखने और इन नशों को पंजाब आने से रोकने के लिए संबंधित राज्यों के समक्ष यह मुद्दा उठाया जा रहा है
चंडीगढ़: पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के माध्यम से नशों की तस्करी के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के कारण नशा तस्करी के तरीकों में बदलाव आया है। अब फार्मास्यूटिकल ड्रग्स पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। पंजाब में नशा-रोधी कानूनों के कार्यान्वयन में हेरोइन की लत के बजाय फार्मास्यूटिकल ड्रग्स की लत एक प्रमुख चुनौती बन गई है।
पंजाब पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पंजाब पुलिस द्वारा पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए बहु-स्तरीय प्रतिक्रिया अपनाई गई है, जिसके परिणामस्वरूप पंजाब में हेरोइन की उपलब्धता में तेजी से कमी आई है। पंजाब पुलिस द्वारा 09 एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं, जिनमें से 03 ‘बाज की आंख’ सिस्टम पहले से ही अमृतसर, तरन तारन और फिरोजपुर में कार्यशील हैं। ये सिस्टम ड्रोन का पता लगाकर उन्हें जाम कर देते हैं।
लंबे समय तक चलने वाले मोबाइल ड्रोन डिटेक्शन प्लेटफॉर्म ‘ड्रोन सेंस डी200 प्रो’ की 03 यूनिटें सीमावर्ती जिलों में तैनात की गई हैं, जो त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती हैं। यह सिस्टम ड्रोन से संबंधित गतिविधियों की सटीक जानकारी प्रदान करता है, जिससे समय पर कार्रवाई संभव हो जाती है। जमीनी स्तर पर तत्काल कार्रवाई के लिए 147 पुलिस कर्मचारियों और 52 ड्रोन रिस्पांस टीमों (डीआरटी) के साथ बीएसएफ के साथ निकट तालमेल में काम किया जा रहा है।
प्रवक्ता ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में ‘विलेज डिफेंस कमेटियों’ (वीडीसी) को ‘ड्रोन रिस्पांस टीमों’ के साथ जोड़ा गया है। इन समितियों को पुलिस के लिए ‘आंख और कान’ के रूप में कार्य करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत 01-03-2025 से अब तक लगभग 80,000 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है और 486 ड्रोन बरामद किए गए हैं।
नशा तस्करी नेटवर्क के आर्थिक आधार को तोड़ने के लिए वित्तीय जांच का उपयोग किया जा रहा है, जिसके तहत 336 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति फ्रीज की गई है। नशों से संबंधित जानकारी देने के लिए बनाई गई इनामी नीति के तहत प्रत्येक ड्रोन की बरामदगी पर 25,000 रुपये का नकद इनाम दिया जाता है। इस वर्ष के दौरान इस नीति के तहत लगभग 2 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है।
पंजाब पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि एंटी-ड्रोन तकनीक, रैपिड रिस्पांस टीमें, बीएसएफ के साथ तालमेल, सामुदायिक सतर्कता, सीसीटीवी निगरानी, नाके, खुफिया जानकारी के आधार पर गिरफ्तारियां, वित्तीय रूप से कमजोर करने, पुनर्वास और रोकथाम पर आधारित पंजाब पुलिस की बहु-स्तरीय प्रतिक्रिया प्रणाली के चलते अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से तस्करी किए जाने वाले नशों की पंजाब में जमीनी स्तर पर उपलब्धता में तेजी से गिरावट आई है।
पंजाब में फार्मास्यूटिकल ड्रग्स की जब्ती से संबंधित आंकड़ों के अनुसार, अधिकांश फार्मास्यूटिकल ड्रग्स पंजाब में नहीं बनाए जाते और हिमाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली आदि राज्यों में बनाए जाते हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि अन्य राज्यों से पंजाब में बड़ी मात्रा में फार्मास्यूटिकल ड्रग्स आ रही हैं। वर्ष 2025 से अब तक उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल सहित अन्य राज्यों से जुड़ी खेपों में से 11.54 लाख नशीली गोलियां/कैप्सूल बरामद किए गए हैं।
एक अनुमान के अनुसार, पंजाब में मिलने वाली फार्मास्यूटिकल ड्रग्स में से 80 प्रतिशत गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली आदि राज्यों से आ रही हैं। यह उस पुराने रुझान के विपरीत है, जब 80 प्रतिशत नशीले पदार्थ पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए पंजाब में तस्करी करके लाए जाते थे।
पंजाब पुलिस के प्रवक्ता ने आगे कहा कि फार्मास्यूटिकल ड्रग्स के इस्तेमाल के उभरते रुझान से निपटने के लिए अंतरराज्यीय तालमेल बेहद जरूरी है। निर्माताओं, वितरकों और संगठित फार्मास्यूटिकल ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के लिए उन राज्यों के साथ लगातार समन्वय बनाकर काम करने की आवश्यकता है, जहां से ये नशीले पदार्थ बनते हैं या जिनके जरिए इनकी तस्करी होती है।
