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पंजाब में निहंगों द्वारा 'खालसा टैक्स' की शुरुआत, हिमाचल से आने वाले वाहनों पर वसूली

पंजाब में निहंग संगठनों ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वसूले जा रहे एंट्री टैक्स के विरोध में 'खालसा टैक्स' की वसूली शुरू कर दी है। इस टैक्स के तहत विभिन्न प्रकार के वाहनों से स्वैच्छिक राशि एकत्र की जा रही है। निहंग नेताओं का कहना है कि यह राशि सामाजिक कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी। हिमाचल में एंट्री टैक्स की व्यवस्था 1975 से लागू है, और हाल के वर्षों में इसमें कई बार वृद्धि की गई है। इस विवाद ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है।
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पंजाब में निहंगों द्वारा 'खालसा टैक्स' की शुरुआत, हिमाचल से आने वाले वाहनों पर वसूली

खालसा टैक्स का विरोध

चंडीगढ़- हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वसूले जा रहे एंट्री टैक्स के खिलाफ अब नया विरोध शुरू हो गया है। पंजाब में निहंग संगठनों ने बुधवार से 'खालसा टैक्स' की वसूली शुरू कर दी है। कुल्लू-मनाली हाईवे पर कीरतपुर साहिब के निकट मोड़ा टोल प्लाजा पर हिमाचल प्रदेश से आने वाले वाहनों से खालसा राज टैक्स के नाम पर स्वैच्छिक राशि एकत्र की जा रही है। इस अभियान का नेतृत्व तरना दल के निहंग कर रहे हैं।


वसूली की प्रक्रिया

तरना दल के प्रतिनिधि निहंग अच्छर सिंह ने बताया कि कारों और छोटे वाहनों से 100 रुपये, हल्के व्यावसायिक वाहनों से 200 रुपये और बड़े वाहनों से 300 से 500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोपहर बाद गांव मोड़ा के निकट सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।


वसूली का उद्देश्य

‘सरबत के भले’ के लिए होगा उपयोग
निहंग नेताओं ने इस वसूली को गैरकानूनी बताने पर कहा कि यह राशि किसी निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि 'सरबत के भले' और सामाजिक कार्यों के लिए खर्च की जाएगी। उनका कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) सड़क निर्माण और रखरखाव के लिए टोल वसूलता है, लेकिन हिमाचल सरकार द्वारा लिया जा रहा एंट्री टैक्स लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।


हिमाचल एंट्री टैक्स विवाद का इतिहास

क्या है हिमाचल एंट्री टैक्स विवाद?
हिमाचल प्रदेश में प्रवेश करने वाले वाहनों से एंट्री टैक्स वसूलने की व्यवस्था 1975 से लागू है। राज्य सरकार का तर्क है कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों के रखरखाव और विकास के लिए अतिरिक्त राजस्व की आवश्यकता होती है।


हाल की बढ़ोतरी

2025 में पहली बढ़ोतरी
अप्रैल 2025 में हिमाचल सरकार ने एंट्री टैक्स दरों में संशोधन किया था। उस समय निजी और व्यावसायिक वाहनों पर 10 से 20 रुपये तक की वृद्धि की गई थी।


विवाद का बढ़ना

2026 में बढ़ा विवाद
फरवरी 2026 में नई टोल नीति के तहत कई श्रेणियों के वाहनों पर शुल्क में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव लाया गया।


मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप

सीएम सुक्खू के हस्तक्षेप के बाद राहत
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को हस्तक्षेप करना पड़ा। 31 मार्च 2026 को सरकार ने निजी कारों और कुछ यात्री वाहनों पर प्रस्तावित बढ़ोतरी वापस लेने की घोषणा की।


राजनीतिक और सामाजिक बहस

राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी
एंट्री टैक्स को लेकर हिमाचल और पड़ोसी राज्यों के बीच बहस अभी भी जारी है। अब पंजाब में 'खालसा टैक्स' की शुरुआत ने इस विवाद को नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम दे दिया है।


खालसा टैक्स का चित्रण