पंजाब में रोडवेज और पनबस कर्मचारियों की हड़ताल, यातायात प्रभावित
पंजाब रोडवेज हड़ताल की जानकारी
पंजाब रोडवेज हड़ताल की खबर: पंजाब में रोडवेज, पनबस और पंजाब रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (PRTC) के ठेका कर्मचारियों ने सोमवार से एक राज्यव्यापी हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल के कारण कई डिपो में बसों का संचालन बाधित हो गया है, जिससे यात्रियों, छात्रों और रोजाना बसों से यात्रा करने वाले लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग वैकल्पिक परिवहन जैसे निजी बसें, टैक्सी और अन्य साधनों का उपयोग करने को मजबूर हैं। यूनियन ने अपनी लंबित मांगों को लेकर यह आंदोलन शुरू किया है और सरकार से शीघ्र समाधान की अपील की है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
पंजाब रोडवेज, पनबस और PRTC के ठेका कर्मचारियों की यूनियन लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष आवाज उठा रही है। उनकी सबसे बड़ी मांग यह है कि वर्षों से कार्यरत ठेका कर्मचारियों को नियमित किया जाए। यूनियन का कहना है कि कई कर्मचारी पिछले 10 से 12 वर्षों से विभाग में कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। इसके अलावा, कर्मचारी आउटसोर्सिंग व्यवस्था को समाप्त करने की भी मांग कर रहे हैं। यूनियन का आरोप है कि आउटसोर्सिंग के कारण कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा, उचित वेतन और अन्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है।
बैठक के बाद की रणनीति
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने बताया कि हड़ताल का नोटिस सरकार को पहले ही दे दिया गया था। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और सरकार के बीच कई बार बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी कारण कर्मचारियों ने रविवार मध्यरात्रि से हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया। सोमवार को परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा के साथ बैठक प्रस्तावित है। यूनियन का कहना है कि यदि बैठक में सरकार उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं देती है, तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा और हड़ताल अनिश्चितकाल तक जारी रह सकती है।
भूख हड़ताल की चेतावनी
कर्मचारी यूनियन ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए विधानसभा सत्र के दौरान मोहाली में भूख हड़ताल शुरू करने की भी घोषणा की है। यूनियन का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं और यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए, उनकी नौकरी से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
पिछले मुकदमे वापस लेने की मांग
कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की एक अन्य प्रमुख मांग यह है कि नवंबर 2025 में हुए आंदोलन के दौरान दर्ज पुलिस मामलों को वापस लिया जाए। यूनियन का कहना है कि किलोमीटर स्कीम के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान कई कर्मचारियों और नेताओं पर मामले दर्ज किए गए थे। कर्मचारियों का कहना है कि इन मामलों को वापस लिया जाना चाहिए, ताकि उन पर कानूनी दबाव कम हो सके। प्रशासन की नजर अब सरकार और यूनियन के बीच होने वाली बातचीत पर है। यदि बैठक में सहमति बनती है, तो बस सेवाएं जल्द सामान्य हो सकती हैं।
