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पंजाब में शिक्षा क्रांति: सरकारी स्कूलों ने खोले NEET और ITI के दरवाजे

पंजाब में सरकारी स्कूलों ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है, जहां शिक्षकों की मेहनत से छात्रों ने NEET और ITI जैसी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी स्कूल अब प्राइवेट स्कूलों को चुनौती दे रहे हैं। इस कार्यक्रम में 300 से अधिक प्राचार्यों को सम्मानित किया गया, जो इस नई शिक्षा प्रणाली के प्रतीक हैं। जानें इस शिक्षा क्रांति के बारे में और क्या बदलाव आ रहे हैं।
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सरकारी स्कूलों की सफलता का जश्न


300 से अधिक प्राचार्यों को मिला सम्मान


चंडीगढ़: पंजाब के सरकारी स्कूल अब प्राइवेट संस्थानों को चुनौती देते हुए शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति का आधार बन चुके हैं। इस बदलाव के पीछे मुख्य रूप से उन शिक्षकों का योगदान है, जो इन स्कूलों में कार्यरत हैं। यह बात दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों को सम्मानित करते समय कही।


शिक्षा में गुणवत्ता का नया मानक

इस अवसर पर पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस भी मौजूद थे। कार्यक्रम में 300 से अधिक प्राचार्यों को सम्मानित किया गया, जिनके छात्रों ने पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस (पेस) पहल के तहत जेईई (मेन), जेईई (एडवांस्ड) और नीट यूजी-2026 परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं।


स्कूल का अर्थ केवल इमारत नहीं

सिसोदिया ने जनसभा में कहा कि स्कूल केवल एक इमारत नहीं होते। सरकार इमारतें बना सकती है, लेकिन शिक्षक ही उन्हें सीखने और सपनों को साकार करने का स्थान बनाते हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब में शिक्षा क्रांति केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विशेषज्ञ कोचिंग, संरचित मार्गदर्शन, निरंतर मूल्यांकन और आवासीय कार्यक्रमों के माध्यम से शैक्षणिक सहयोग पर भी केंद्रित है।


सरकारी स्कूलों की छवि में बदलाव

उन्होंने कहा कि अब लाखों छात्रों के लिए सरकारी स्कूल में शिक्षा प्राप्त करना कोई समझौता नहीं रह गया है। यह अब आईआईटी, एनआईटी, मेडिकल कॉलेजों और बेहतर भविष्य की ओर जाने का मार्ग बन चुका है। इस कार्यक्रम में पीडीसी सदस्य अनुराग कुंडू, स्कूल शिक्षा (माध्यमिक) के निदेशक एसएस बल्ल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।