पंजाब में स्कूल फीस वृद्धि पर नियंत्रण, अभिभावकों को मिली राहत
स्कूल फीस वृद्धि पर नई नीति
-5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे स्कूल प्रबंधन
पंजाब में मान सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे अभिभावकों को महंगी फीस के बोझ से राहत मिली है। स्कूल ऑफ एमीनेंस में छात्रों को वे सभी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, जो सरकारी और निजी स्कूलों में उपलब्ध होती हैं। अब ये स्कूल प्राइवेट संस्थानों से भी आगे निकल चुके हैं। इसके साथ ही, महंगी शिक्षा पर नियंत्रण लगाने के लिए फीस वृद्धि की अधिकतम सीमा भी निर्धारित कर दी गई है।
राज्य के गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूल अब एक शैक्षणिक वर्ष में 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। यदि पिछले 36 महीनों में कुल फीस वृद्धि 15 प्रतिशत से अधिक हुई है, तो अतिरिक्त वसूली गई राशि को अभिभावकों को 90 दिनों के भीतर वापस करना होगा। इसके अलावा, यदि किसी स्कूल को 5 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने की आवश्यकता है, तो उसे सत्र शुरू होने से 180 दिन पहले जिला नियामक संस्था को प्रस्ताव भेजकर अनुमति लेनी होगी। इसके साथ ही, कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है। मान सरकार के इस निर्णय से अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है।
अभिभावकों का कहना है कि वे कई वर्षों से बढ़ी हुई फीस का भुगतान कर रहे थे, लेकिन अब सरकार के नियमों के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पर अधिक बोझ नहीं पड़ेगा। दरअसल, नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की राशि भी बढ़ा दी गई है। फीस वापसी के आदेश का पालन न करने पर 10 हजार रुपये प्रतिदिन का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि जुर्माना और वापसी की राशि जमा नहीं की जाती है, तो स्कूल की मान्यता या संबद्धता वापस लेने की कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि, मान्यता या संबद्धता वापस लेने से पहले स्कूल को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाएगा.
