पंजाब सरकार का नशा विरोधी अभियान: करोड़ों की संपत्तियों का ध्वस्तीकरण
पंजाब में नशे के खिलाफ जन आंदोलन
पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ एक व्यापक अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य नशा तस्करों के नेटवर्क को समाप्त करना है। इस मुहिम के तहत नशे से अर्जित संपत्तियों को ध्वस्त किया जा रहा है और उन्हें जब्त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने हाल ही में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जब तक पंजाब नशे की समस्या से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता, तब तक इस अभियान को तेज किया जाए।
मुख्यमंत्री ने एक वर्चुअल बैठक में कहा कि इस अभियान ने नशे की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने और बड़े तस्करों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल पुलिस की लड़ाई नहीं है, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
1.5 लाख 'पिंड दे पहरेदार' गांवों में सक्रिय हैं, और हजारों युवाओं को डी-एडिक्शन सेंटर्स में भेजा गया है। स्कूलों में एंटी-ड्रग जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। यह लड़ाई पंजाब की युवा पीढ़ी को बचाने के लिए है और इसे निरंतर जारी रखा जाएगा।
मार्च 2025 से फरवरी 2026 तक नशे के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति लागू की गई है। इस दौरान 16.70 करोड़ रुपये की ड्रग मनी बरामद की गई है और तस्करों से संबंधित करोड़ों रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं। एनडीपीएस एक्ट के तहत सजा दर लगभग 84 प्रतिशत रही है, जो 2025 में बढ़कर 88 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है।
पंजाब को नशा मुक्ति मोर्चा के तहत पांच जोन में बांटा गया है, जिसमें दोआबा, माझा, मालवा ईस्ट, मालवा वेस्ट और मालवा सेंट्रल शामिल हैं। विलेज डिफेंस कमेटियों को नशा तस्करों की रिपोर्टिंग के लिए एक सुरक्षित एप प्रदान की गई है, जिससे 48 घंटों के भीतर कार्रवाई की जा सके। अब तक 2,000 से अधिक शिकायतों के आधार पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। नशा छुड़ाने के केंद्रों में भी सुधार किया गया है, जिसमें स्किल ट्रेनिंग की शुरुआत की गई है।
