पंजाब सरकार के ऐतिहासिक फैसले: 30 सितंबर तक सभी सर्टिफिकेट मुफ्त
पंजाब सरकार के जनहित में उठाए गए कदम
चंडीगढ़: पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य के निवासियों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान करते हुए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। बुधवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक के बाद, कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन जनहितकारी फैसलों की जानकारी साझा की। सरकार ने आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के साथ-साथ किसानों और घर खरीदारों के लिए भी कई महत्वपूर्ण रियायतों की घोषणा की है, जिससे लाखों लोगों को सीधा लाभ होगा।
30 सितंबर तक सभी जरूरी सर्टिफिकेट मुफ्त
चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट में संशोधन के चलते लोगों को विभिन्न दस्तावेजों की आवश्यकता हो रही है। इस संदर्भ में, पंजाब सरकार ने गरीब और ग्रामीण समुदाय को बड़ी आर्थिक राहत प्रदान की है। मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि 1 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक रिहायशी, जाति, जन्म और शैक्षणिक योग्यता के सर्टिफिकेट बनवाने पर लगने वाली सुविधा शुल्क पूरी तरह से माफ कर दी गई है। पहले डोर-स्टेप डिलीवरी सेवाओं के लिए 70 रुपये और अन्य के लिए 50 रुपये शुल्क लिया जाता था, जो अब इन तीन महीनों के लिए पूरी तरह से मुफ्त होगा।
किसानों के लिए भूमि अधिग्रहण में राहत
राज्य में विकास कार्यों के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के मालिकों और किसानों को भी सरकार ने राहत दी है। पुरानी नीति में बदलाव करते हुए, अब प्रति एकड़ भूमि के बदले मिलने वाले 200 गज के कमर्शियल प्लॉट का आकार बढ़ाकर 210 गज कर दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति कमर्शियल प्लॉट नहीं लेना चाहता, तो उसे रिहायशी प्लॉट में 30 गज का अतिरिक्त लाभ देकर कुल 1630 गज का प्लॉट दिया जाएगा। कमर्शियल प्रोजेक्ट वाली जगहों पर भी 800 गज की सीमा को बढ़ाकर 840 गज कर दिया गया है। इसके अलावा, जिन लोगों की 1 एकड़ या उससे अधिक भूमि अधिग्रहित होगी, उन्हें बिना किसी नीलामी के सरकारी रिजर्व प्राइस पर एक अतिरिक्त प्लॉट लेने का विकल्प भी मिलेगा।
अवैध कॉलोनियों को नियमित करने का निर्णय
पंजाब में बिना मंजूरी के बनी अवैध कॉलोनियों के मुद्दे पर भी कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नई नीति के तहत, जिन अवैध कॉलोनियों में कम से कम 25 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, उन्हें अब सरकार द्वारा नियमित किया जाएगा। इसके लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) या डेवलपर को रिहायशी इलाके के लिए कलेक्टर रेट (डीसी रेट) का 5 प्रतिशत और कमर्शियल इलाके के लिए 10 प्रतिशत चार्ज जमा करना होगा। प्रक्रिया पूरी होने पर सरकार पहले प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी करेगी और साढ़े चार साल में कॉलोनी विकसित होने के बाद ही आगे प्लॉटों की खरीद-फरोख्त हो सकेगी।
प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के लिए NOC की आवश्यकता समाप्त
सरकार के इस निर्णय का सबसे बड़ा लाभ उन आम लोगों को होगा, जिन्होंने इन कॉलोनियों में अपनी मेहनत की कमाई लगाई है। जो कॉलोनियां इस नई सरकारी प्रक्रिया के तहत नियमित हो जाएंगी, वहां के निवासियों या नए प्लॉट खरीदारों को अपनी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (सेल डीड) करवाने के लिए संबंधित अथॉरिटी से किसी भी प्रकार की NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। हालांकि, मंत्री चीमा ने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल उन्हीं कॉलोनियों को मिलेगी, जिनके मुख्य मालिक या डेवलपर ने सरकार की इस नई नीति और प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया होगा।
